
संदर्भ: दैनिक भास्कर (ब्यावर-किशनगढ़ संस्करण), दिनांक 07 मई 2026, पृष्ठ संख्या 03 शिक्षा का आंगन वह पावन स्थल है जहाँ राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है। किंतु जब इस मंदिर के संरक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आने लगें, तो समाज और व्यवस्था दोनों के लिए यह गहन चिंता का विषय बन जाता है।
हाल ही में दैनिक भास्कर के माध्यम से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, काबरा का जो प्रकरण सार्वजनिक हुआ है, वह केवल एक प्रशासनिक शिकायत नहीं, बल्कि हमारे शैक्षिक परिवेश में व्याप्त अनैतिकता का एक ज्वलंत उदाहरण है।
सत्ता का दुरुपयोग और ‘विकास’ का मुखौटा समाचार पत्र में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार, विद्यालय की प्रधानाचार्य एवं पीईईओ डॉ. सीमा कृपलानी पर अधीनस्थ शिक्षकों ने ‘विकास’ के नाम पर अवैध वसूली और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह विडंबना ही है कि शिक्षकों के संवैधानिक हक, जैसे एसीपी (ACP), एरियर भुगतान, वेतन निर्धारण और मातृत्व अवकाश, को उनकी निष्ठा के आधार पर नहीं, बल्कि ‘आर्थिक भेंट’ के आधार पर तय किया जा रहा है।
लोक सेवक के रूप में हमारा उत्तरदायित्व नियमों की पालना सुनिश्चित करना है, न कि नियमों को आर्थिक लाभ का जरिया बनाना।
भय का वातावरण और खंडित होता मनोबल एक शिक्षाविद के रूप में मेरा मानना है कि भयमुक्त वातावरण ही उत्कृष्ट शिक्षण की पहली शर्त है।
समाचार में उल्लेखित चयनित प्रताड़ना जहाँ भुगतान करने वालों के कार्य तत्काल होते हैं और मना करने वालों की सेवा-पुस्तिकाओं में त्रुटियाँ निकाली जाती हैं—अत्यंत निंदनीय है।
शिक्षकों से प्रार्थना-पत्र लिखवाकर उनके वेतन से अवैध कटौती करवाना न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि एक बौद्धिक वर्ग के स्वाभिमान पर भी प्रहार है।
राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर का आह्वान हमारा संगठन, राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर, बाबा साहब के संवैधानिक मूल्यों ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ में अटूट विश्वास रखता है। हम किसी भी स्तर पर होने वाले शोषण को स्वीकार नहीं करेंगे।
यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के साथ-साथ जवाबदेही और नैतिक निगरानी की कितनी आवश्यकता है।
हम जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग करते हैं कि
इस प्रकरण की उच्च स्तरीय और समयबद्ध जांच की जाए।
दोषी पाए जाने पर संबंधित पद के विरुद्ध ऐसी दंडात्मक कार्रवाई हो जो नजीर बन सके।
काबरा विद्यालय और संबंधित क्षेत्र के शिक्षकों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण पुनः उपलब्ध कराया जाए।
उपसंहार
यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर कठोर कदम नहीं उठाए, तो व्यवस्था से आम शिक्षक का विश्वास उठ जाएगा। हम इस संघर्ष में अपने शिक्षक साथियों के साथ न्याय मिलने तक पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ खड़े हैं। शिक्षा जगत में शुचिता और पारदर्शिता की बहाली ही
हमारा प्राथमिक लक्ष्य है।

लेखक
सोहनलाल सिंगारिया
प्रदेश उपसभा अध्यक्ष,
राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर
