बसंत ऋतु आईं पेड़ पौधों परकलिया खिलें सारी।
हर जगह हर डालीं हरी भरी हुई सारी।।
पतझड़ बाद कलियां खिली रंग भर दियोसारो।
फुल फुल से भर दी डालीं वातावरण में सुगन्ध भर दी सारी।

तितलियां उड़ फुलो पर बेठै,जाणे फुल बिखेर सारा।
भंवरा तो फुलो उड़ता,वासना भर देता आपने में सारा।।
आशा ममता सभी हरसाई, बागों में फुल दिया दिखाई।
प्रेम प्रेमिका तोड़ें फुल, देवें माथे रों गजरों बनाईं।।
पशु पक्षी सभी अच्छे लागें, ऊपर फुलो भरी डालीं लागें।
पेड़ पौधों हरा भरा हरखावें,जोई जोई टहनी अपनों सेहरों मुस्कावे।।
बसंत पंचमी से बसंत ऋतु आवें, पेड़ पौधों सभी हरसावें।
कलीं कलीं पर भंवरा तितलियां बैठें, हर फुल हर कलीं को गीत सुणावें।।


लेखक।।
टीकमचंद मंशा राम जी।।
आदर्श ढूंढा कवास बाड़मेर राजस्थान।।
9414972123.

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