आजकल देश में महंगाई का ऐसा दौर चल रहा है कि आम आदमी की जेब और दिल दोनों हल्के होते जा रहे हैं। सब्ज़ी से लेकर गैस सिलेंडर तक हर चीज़ आसमान छू रही है, और जेब में पड़े नोट बेचारे शर्म से सिकुड़ जाते हैं। लेकिन घबराइए मत, लोकतंत्र की इस महान सिस्टम (व्यवस्था) में हर समस्या का कोई न कोई हल ज़रूर निकल आता है। बस आपको सही दिशा में कदम बढ़ाने की ज़रूरत है। कुछ लोग मेहनत करके कमाते हैं, और कुछ लोग माहौल देखकर कमाते हैं। समाज में एक अजीब सा माहौल (परिस्थिति) बन चुका है कि महंगाई की शिकायत करने वालों को सलाह दी जाती है—“भाई, अगर महंगाई काट रही है तो कोई नया धंधा पकड़ लो।” और ये धंधे भी ऐसे हैं जिनमें पूंजी कम और नारे ज़्यादा लगते हैं।

(1)सबसे पहला और सबसे सुरक्षित व्यवसाय है राजनीति से जुड़ना। अगर आप सीधे चुनाव नहीं लड़ सकते तो किसी बड़े दल विशेष तौर से वहभाजपा जैसे कोई भी पार्टी हो सकती है, के झंडे के नीचे खड़े हो जाइए। यहाँ पॉलिटिक्स (राजनीति) का गणित बड़ा सरल है—जो ज़्यादा नारे लगाएगा, वही ज़्यादा आगे जाएगा। पार्टी के बड़े नेता जब भाषण देंगे तो आप भीड़ में सबसे ज़ोर से ताली बजाइए। इससे आपकी पहचान बनती है। धीरे-धीरे आपको भी मंच के पास खड़े होने का मौका मिल जाएगा। यही वह जगह है जहाँ से आपकी तरक़्क़ी (उन्नति) की सीढ़ी शुरू होती है।

(2)दूसरा व्यवसाय है संघ से प्रेरित सामाजिक कार्यकर्ता बनना। सुबह शाखा, शाम को राष्ट्रभक्ति का व्याख्यान, और बीच में सोशल मीडिया पर देशभक्ति की पोस्ट—यही रोज़गार का नया मॉडल है। यहाँ नेटवर्क (संपर्क तंत्र) बहुत तेज़ी से बनता है। आप जितने लोगों से जुड़ेंगे, उतने मौके खुलेंगे। धीरे-धीरे आपको छोटे-मोटे कार्यक्रमों की जिम्मेदारी मिलती है और आपकी पहचान बनती जाती है। फिर कोई न कोई आपको “समाजसेवी” कहने लगता है, और यही आपकी असली शोहरत (यश) बन जाती है।

(3)तीसरा व्यवसाय है अंधभक्ति। यह सबसे आसान और कम लागत वाला स्टार्ट-अप है। इसमें आपको किसी तर्क की ज़रूरत नहीं होती, बस हर सवाल का जवाब एक ही होता है—“सब ठीक है।” अगर कोई महंगाई की बात करे तो तुरंत विषय बदल दीजिए। या फिर विपक्षी दलों को दोषी ठहरा दीजिए।यहाँ लॉजिक (तर्क) की जगह भावनाओं का व्यापार चलता है। जितना ज़ोर से आप अपने नेता की तारीफ करेंगे, उतना ही आपका जुनून (उत्साह) लोगों को दिखाई देगा। धीरे-धीरे आप भी टीवी बहसों में दिखाई देने वाले विशेषज्ञों जैसे बन सकते हैं।

(4)चौथा व्यवसाय है लाभार्थी बनना। यह बहुत ही दिलचस्प मॉडल है। इसमें मेहनत कम और योजनाओं की जानकारी ज़्यादा चाहिए। सरकार कोई नई योजना लाए तो तुरंत फार्म भर दीजिए। यहां कहीं तिकड़मबाज हैं जो ऐसे फॉर्म भरवाते रहते हैं जो बहुत कम पकड़ में आते हैं जैसे ई मित्र चलने वाला, यहाँ स्कीम (योजना) ही आपकी आय का स्रोत है। लोग कहते हैं कि यह सुविधा गरीबों के लिए है, लेकिन असली खिलाड़ी वही है जो हर योजना का फायदा उठा ले। फिर धीरे-धीरे आप अपने मोहल्ले में सलाहकार बन जाते हैं और लोग आपको मशविरा (सलाह) लेने आने लगते हैं।

(5)पाँचवाँ व्यवसाय है गो-भक्ति का। यह भावनाओं और परंपराओं का बड़ा बाजार है। अगर आप सुबह-सुबह दो-चार तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दें तो लोग आपको धर्मरक्षक मानने लगेंगे। यहाँ इमोशन (भावना) सबसे बड़ी पूंजी है। कभी-कभी किसी मुद्दे पर जोरदार बयान दे दीजिए, और आप तुरंत सुर्खियों में आ जाते हैं। किसी भी मेटाडोर को जिसमें पशुधन जा रहा है उसको धमका कर पुलिस का डर दिखाकर आप कुछ भी कर सकते हैं।देखते-देखते आपकी इज़्ज़त (सम्मान) भी बढ़ जाती है और लोग आपको समाज का संरक्षक समझने लगते हैं।

(6)इन सब व्यवसायों का एक साझा नियम है—जितना कम सवाल, उतनी ज़्यादा सफलता। अगर आपने ज्यादा सवाल पूछ लिए तो खेल बिगड़ सकता है। इसलिए यहाँ डिसिप्लिन (अनुशासन) का मतलब है कि जो ऊपर से कहा जाए, वही सही मान लेना। जो लोग इस नियम को समझ जाते हैं, वे जल्दी आगे निकल जाते हैं। फिर उन्हें हर मंच पर बुलाया जाता है और उनका अंदाज़ (ढंग) भी खास बन जाता है।

(7)आज के दौर में सोशल मीडिया भी इन व्यवसायों का अहम हिस्सा है। अगर आपकी पोस्ट पर हजार लाइक आ गए तो समझिए कि आपकी दुकान चल निकली। यहाँ फॉलोअर (अनुयायी) ही आपकी असली पूंजी हैं। जितने ज्यादा फॉलोअर, उतनी ज्यादा चर्चा। और जब चर्चा बढ़ती है तो आपका वजूद (अस्तित्व) भी मजबूत हो जाता है।

(8)कुछ लोग कहते हैं कि ये सब असली रोजगार नहीं हैं, लेकिन जमाना बदल चुका है। आजकल हर चीज़ एक ब्रांड (पहचान) बन सकती है। अगर आप सही समय पर सही नारा लगा दें तो लोग आपको नेता, समाजसेवी या धर्मरक्षक मान लेते हैं। फिर धीरे-धीरे आपकी सियासत (राजनीति) भी मजबूत होने लगती है। आप किसी झूठ पर भी अपनी बात पर कितने अड़े रहते हैं यही आपकी योग्यता होनी चाहिए।

(9)अंत में यही कहना है कि अगर महंगाई आपको परेशान कर रही है तो दुखी होने की जरूरत नहीं। देश में अवसरों की कोई कमी नहीं है, बस आपको सही रास्ता चुनना है। आजकल मेहनत से ज्यादा मैनेजमेंट (प्रबंधन) काम आता है। जो लोग माहौल को समझ लेते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। बाकी लोग बस महंगाई का रोना रोते रह जाते हैं और उनकी फिक्र (चिंता) कभी खत्म नहीं होती।

(समापन)
इसलिए अगली बार जब सब्ज़ी वाला आपको महंगी सब्ज़ी दे तो परेशान मत होइए। मुस्कुराइए और सोचिए—“शायद अब समय आ गया है कि मैं भी कोई नया धंधा शुरू करूँ।” आखिर इस महान लोकतंत्र में हर किसी के लिए जगह है। बस आपको सही ऑप्शन (विकल्प) चुनना है और फिर पूरे हौसले (साहस) के साथ मैदान में उतर जाना है।

संकलन कर्ता
हगामी लाल मेघवंशी,रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर, आध्यात्मिक और सामाजिक चिंतक। 9829 230 966

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