नवीन आयकर अधिनियम, 2025 एवं नियम, 2026: व्यापक मार्गदर्शिका

TDS/TCS प्रावधानों, प्रक्रियात्मक सरलीकरण एवं कटौतीकर्ताओं (Deductors) हेतु अनिवार्य सावधानियों का विस्तृत विश्लेषण

संकलन एवं प्रस्तुति: सोहनलाल सिंगारिया

भारत सरकार द्वारा कर व्यवस्था में व्यापक सुधार एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ‘आयकर अधिनियम, 2025’ तथा ‘आयकर नियम, 2026’ को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।

यह नवीन वैधानिक व्यवस्था पुराने 64-वर्षीय ‘आयकर अधिनियम, 1961’ को प्रतिस्थापित करते हुए कर-प्रणाली को अधिक सरल, सुगम, संक्षिप्त और पारदर्शी बनाती है।

इस आलेख का मुख्य उद्देश्य सभी आहरण एवं वितरण अधिकारियों (DDOs), कर कटौतीकर्ताओं (Deductors) एवं करदाताओं के लिए नवीन अधिनियम की बारीकियों, प्रक्रियात्मक बदलावों एवं संभावित त्रुटियों के समाधान को अत्यंत सरल एवं व्यावहारिक भाषा में स्पष्ट करना है।

  1. नवीन आयकर अधिनियम, 2025: पृष्ठभूमि एवं मूल नीतियाँ

माननीय वित्त मंत्री द्वारा 23 जुलाई 2024 के बजट भाषण में दिए गए निर्देशों के आलोक में, आयकर अधिनियम 1961 का व्यापक पुनरीक्षण किया गया।

इस ऐतिहासिक सुधार का मूल सिद्धांत मूल कर दरों या मूलभूत कर नीतियों में कोई प्रतिकूल परिवर्तन किए बिना कानून की भाषा को सरल, सुबोध और छोटा बनाना है।

मुख्य सुधारात्मक बिंदु (1961 बनाम 2025)

संक्षिप्तता (Conciseness): अधिनियम के आकार को लगभग आधा कर दिया गया है।

मूल प्रावधानों को अक्षुण्ण रखते हुए अनावश्यक विवरण हटाए गए हैं।

सुगम भाषा
जटिल शर्तों और कानूनी जाल-उलझनों (Provisos) के स्थान पर स्पष्ट तालिकाओं (Tables) और तार्किक समूहों का उपयोग किया गया है।

अविच्छिन्नता
पूर्व में अर्जित अधिकारों और दायित्वों की रक्षा की गई है ताकि करदाताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

तुलनात्मक विवरण (1961 का अधिनियम बनाम 2025 का नया अधिनियम)

कुल भाग (Parts): पुराने अधिनियम में 3 भाग थे, जबकि नए अधिनियम में इसे घटाकर 2 कर दिया गया है।

कुल धाराएं (Sections): पुराने अधिनियम में 65 धाराएं थीं, जो नए अधिनियम में घटकर केवल 13 रह गई हैं।

शब्दों की संख्या (Word Count): पुराने अधिनियम में लगभग 27,500 शब्द थे, जिन्हें संक्षिप्त कर नए अधिनियम में लगभग 14,600 शब्द कर दिया गया है।

आयकर नियम (Rules):
पुराने नियमों की संख्या 29 थी, जो नए नियमों में घटकर 19 रह गई है।

वैधानिक प्रपत्र (Forms):
पुराने अधिनियम के तहत 33 फॉर्म थे, जिन्हें नए अधिनियम में सरल करके 26 कर दिया गया है।
उप-नियम (Sub-rules): पुराने नियमों में 175 उप-नियम थे, जो अब घटकर मात्र 100 रह गए हैं।

  1. ‘Tax Year’ का नवीन एकीकृत प्रत्यय एवं संक्रमण काल (Transition Period)
    नवीन अधिनियम में कर प्रशासन को अत्यधिक सरल बनाने के लिए ‘वित्तीय वर्ष’ (Financial Year) तथा ‘मूल्यांकन वर्ष’ (Assessment Year) की पारंपरिक दोहरी अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर केवल एक एकीकृत अवधारणा “Tax Year” (कर वर्ष) लागू की गई है।
    संक्रमण काल (Transition Period) का स्वर्णिम नियम:
    31 मार्च, 2026 तक या उससे पूर्व: किए गए समस्त भुगतान एवं कटौती ‘आयकर अधिनियम, 1961’ के तहत प्रशासित होंगे।
    01 अप्रैल, 2026 अथवा उसके पश्चात्: किए गए समस्त भुगतान एवं कर कटौती ‘आयकर अधिनियम, 2025’ के अंतर्गत प्रशासित होंगे।

पोर्टल पर संक्रमण काल के दौरान e-filing सिस्टम दोनों अधिनियमों को एक साथ सपोर्ट करेगा।

AY 2026-27 का AIS पुराने 1961 एक्ट के डेटा को दर्शाएगा, जबकि Tax Year 2026-27 के लिए ‘Form 168’ (जो Form 26AS का स्थान लेगा) नए 2025 एक्ट के तहत जारी होगा।

  1. TDS/TCS धाराओं का पुनर्गठन एवं धारा 393 का ढांचा
    नए अधिनियम में TDS तथा TCS के बिखरे हुए प्रावधानों को एकीकृत धाराओं के अंतर्गत संरचित किया गया है।

उदाहरण के लिए, वेतन से TDS जो पूर्व में धारा 192 और PF निकासी हेतु धारा 192A में था, अब संयुक्त रूप से धारा 392 के अंतर्गत आ गया है।

इसी प्रकार अन्य भुगतानों पर TDS कटौती धारा 393 के तहत सूचीबद्ध की गई है।

धारा 393 के अंतर्गत तालिकाओं की व्यवस्था

तालिका 1 (Table 1)
निवासी व्यक्तियों को किए जाने वाले भुगतान (किराया, ब्याज, कमीशन आदि)।

तालिका 2 (Table 2): अनिवासियों (Non-residents) को किए जाने वाले भुगतान।

तालिका 3 (Table 3): किसी भी व्यक्ति को विशेष भुगतानों (ऑनलाइन गेमिंग, जीत आदि) पर TDS।

तालिका 4 व 5: गैर-कटौती (No-deduction) की शर्तें एवं
घोषणा-आधारित छूट व्यवस्था।

TDS कटौती हेतु 4 स्वर्णिम नियम (Rules of Thumb)

  1. प्राप्तकर्ता (Payee) कौन है? सही तालिका (Table) का चयन करें।
  2. भुगतान की प्रकृति (Nature) क्या है? संबंधित पंक्ति का चयन करें।
  3. कटौतीकर्ता (Payer) कौन है? विशिष्ट या नामित श्रेणी की जांच करें।
  4. क्या सीमा (Threshold) पार हुई है? एकल अथवा वार्षिक कुल सीमा की जांच करें।
  5. TDS जमा करने एवं विवरण प्रस्तुत करने की संशोधित समय-सीमा

कटौतीकर्ताओं द्वारा काटे गए TDS को सरकारी कोष में जमा कराने एवं त्रैमासिक विवरण (TDS Returns) प्रस्तुत करने की नियत तिथियाँ निम्न प्रकार हैं

प्रथम तिमाही (Q1: अप्रैल से जून): भुगतान की तिथि पर TDS कटौती होगी।

TDS जमा कराने की नियत तिथि अगले माह की 7 तारीख (अर्थात् मई, जून व जुलाई की 7 तारीख) है।

TDS रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है।

द्वितीय तिमाही (Q2: जुलाई से सितंबर): भुगतान की तिथि पर TDS कटौती होगी।

TDS जमा कराने की नियत तिथि अगले माह की 7 तारीख है।

TDS रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर है।

तृतीय तिमाही
(Q3: अक्टूबर से दिसंबर)

भुगतान की तिथि पर TDS कटौती होगी।

TDS जमा कराने की नियत तिथि अगले माह की 7 तारीख है।

TDS रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी है।

चतुर्थ तिमाही
(Q4: जनवरी से मार्च)

भुगतान की तिथि पर TDS कटौती होगी।

मार्च माह के TDS जमा कराने हेतु विशेष छूट के तहत 30 अप्रैल तक की नियत तिथि दी गई है।

चतुर्थ तिमाही का TDS रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई है।

  1. प्रपत्रों (Forms) एवं नियमों में प्रमुख परिवर्तन
    नियम 2026 के अंतर्गत करदाताओं की सुविधा हेतु अनेक प्रपत्रों को एकीकृत एवं आधुनिक बनाया गया है

त्रैमासिक वेतन TDS रिटर्न
पुराने अधिनियम में प्रयुक्त Form 24Q का स्थान अब नए अधिनियम में Form 138 ने ले लिया है।

वार्षिक वेतन TDS प्रमाण-पत्र पुराने Form 16 के स्थान पर अब नए अधिनियम में Form 130 जारी किया जाएगा।

वार्षिक सूचना विवरण (AIS / 26AS): पुराने Form 26AS का स्थान अब नए अधिनियम में Form 168 लेगा।

प्रक्रियात्मक सुधारीकरण:
नगद निकासी
(Cash Withdrawal)
पुराने 194N की जटिलता

(फाइलर/नॉन-फाइलर की अलग दरें) समाप्त कर धारा 393(3) के तहत ₹1 करोड़ की एक समान सीमा तय कर दी गई है।

सुधार विवरण
(Correction Statement): त्रैमासिक विवरण में संशोधन की समय सीमा को 6 वर्ष से घटाकर 2 वर्ष कर दिया गया है।

कम कटौती प्रमाण-पत्र
(LDC u/s 395)
धारा 395 के तहत इसका दायरा बढ़ाया गया है तथा निरस्तीकरण से पूर्व कारण बताओ अवसर अनिवार्य किया गया है।

कर्मचारियों हेतु सरलीकरण: वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नियम 26A (वेतन विवरण) और 26B (अन्य आय/TDS विवरण) को मिलाकर एकल प्रपत्र बना दिया गया है।

TCS भुगतान तिथि संरेखण: मार्च माह के TCS जमा की तिथि को 7 अप्रैल से बढ़ाकर TDS की भांति 30 अप्रैल कर दिया गया है।

  1. कटौतीकर्ताओं (Deductors)
    द्वारा की जाने वाली सामान्य त्रुटियां एवं उनके दुष्परिणाम
    आयकर कार्यालय के अनुभव के आधार पर यह देखा गया है कि आहरण एवं वितरण अधिकारी/डिडक्टर्स अनजाने में कई प्रक्रियात्मक त्रुटियां कर बैठते हैं, जिससे अनावश्यक पेनल्टी व नोटिस प्राप्त होते हैं
  2. गलत PAN/TAN दर्ज करना: इसके कारण उच्च दर (20%) से कटौती की मांग निकलती है तथा कर्मचारी के 26AS/168 में कर क्रेडिट जमा नहीं हो पाता।
  3. गलत धारा/सेक्शन कोड चुनना: जैसे वेतन के लिए धारा 192/392 के स्थान पर 194C (ठेकेदार) चुन लेना। इससे दरों का बेमेल (Mismatch) उत्पन्न होता है।
  4. विलंबित जमा पर ब्याज: निर्धारित तिथि के बाद कर जमा कराने पर 1.5% प्रति माह (या उसके भाग) की दर से दंडात्मक ब्याज देय होता है।
  5. रिटर्न दाखिल न करना / देरी: धारा 234E के अंतर्गत त्रैमासिक विवरण देर से भरने पर ₹200 प्रति दिन का विलंब शुल्क (Late Fee) लागू होता है (जो कुल TDS राशि से अधिक नहीं होगा)।
  6. प्रमाण-पत्र (Form 16/130) में देरी: कर्मचारियों को समय पर फॉर्म जारी न करने से वे अपना आयकर रिटर्न समय पर दाखिल नहीं कर पाते, जिससे प्रशासनिक असंतोष बढ़ता है।
  7. रिटर्न का सत्यापन (Verification) न करना: बिना e-verification के प्रस्तुत विवरणियां अमान्य मानी जाती हैं।
  8. सुचारू कर अनुपालन हेतु महत्वपूर्ण सुझाव (Solutions)
    पूर्व-सत्यापन: TDS कटौती से पूर्व कर्मचारी/विक्रेता के PAN/TAN नंबर का TRACES पोर्टल पर सत्यापन अवश्य करें।

समयबद्धता
अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना प्रत्येक माह की 7 तारीख से पूर्व TDS जमा कराएं तथा नियत तिथि से पूर्व रिटर्न दाखिल करें।

व्यक्तिगत पर्यवेक्षण
आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) पूरी तरह कंप्यूटर ऑपरेटर या सीए/परामर्शदाता पर निर्भर न रहें, जमा चालानों एवं विवरणियों का स्वयं पुनरीक्षण करें।

तत्काल त्रुटि सुधार
किसी भी नोटिस या Mismatch की स्थिति में CPC-TDS या स्थानीय आयकर कार्यालय से तुरंत संपर्क कर समाधान करें।

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहनलाल सिंगारिया
सामाजिक-आर्थिक चिन्तक एवं विचारक ब्यावर-94622-60179

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