लेखक- सोहन लाल सिंगारिया

प्रस्तावना
वैचारिक दासता और अंधविश्वास किसी भी समाज को भीतर से खोखला कर देते हैं। जब तक हम चेतना के स्तर पर तार्किक नहीं होंगे, तब तक ढोंग और पाखंड के सौदागर हमारे जीवन से खेलते रहेंगे।

आज हमारा बहुजन समाज जिस सामाजिक और आर्थिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है, वहां शिक्षा की कमी, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव और सबसे बढ़कर तार्किक दृष्टिकोण की शिथिलता हमारे सीधे-साधे, श्रमशील लोगों को लगातार ठगी और शोषण का शिकार बना रही है।

हाल ही में राजस्थान के दौसा जिले के गुड़ा कटला (बांदीकुई) गांव से सामने आई एक रोंगटे खड़े कर देने वाली आपराधिक घटना ने संपूर्ण मानवता और विशेषकर हमारे ग्रामीण समाज को झकझोर कर रख दिया है। राष्ट्रीय समाचार चैनल न्यूज़ 18 इंडिया की एक विशेष जमीनी पड़ताल ने एक ऐसे भयावह सच को बेनकाब किया है, जिसे जानने के बाद किसी भी संवेदनशील व्यक्ति की रूह कांप उठे।

यह लेख केवल एक जघन्य अपराध की कथा नहीं है, बल्कि यह हमारे बहुजन समाज को वैचारिक रूप से उद्वेलित करने, ढोंगियों के सुनियोजित चंगुल से सावधान करने और उनके भीतर एक वैज्ञानिक चेतना का बीजारोपण करने का एक गंभीर और निष्पक्ष वैचारिक प्रयास है।

वीडियो का संदर्भ और घटना की पृष्ठभूमि रामेश्वर धाम का ‘काला सच
साझा की गई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दौसा के गुड़ा कटला गांव में स्थित ‘रामेश्वर धाम आश्रम’ में पिछले लगभग दो वर्षों से एक व्यक्ति ‘संत दयादास’ के छद्म नाम और भगवे वस्त्रों की ओट में रह रहा था।

वह दिन भर रामचरितमानस का पाठ करता, सत्य और मानवता के उपदेश देता, और स्वयं को आयुर्वेद का मर्मज्ञ तथा असाध्य बीमारियों (जैसे किडनी की पथरी, दमा आदि) का डॉक्टर बताता था।

लेकिन जब दिल्ली पुलिस की टीम ने वहां जाल बिछाकर उसे दबोचा, तो उस तथाकथित ‘संत’ के पीछे छिपा जो वीभत्स चेहरा उजागर हुआ, उसने पूरे देश को हतप्रभ कर दिया।

वह कोई साधु या परोपकारी वैद्य नहीं था, बल्कि साठ से अधिक उम्र का कुख्यात सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा उर्फ ‘डॉक्टर डेथ’ था।

इस अपराधी का पुराना इतिहास रोंगटे खड़े करने वाला है

● वह पूर्व में 50 से अधिक निर्दोष लोगों (मुख्यतः टैक्सी ड्राइवरों) की बेरहमी से हत्या करने का दोषी है।

● वह अंतराज्जीय स्तर पर 125 से अधिक लोगों की अवैध रूप से किडनी निकालने वाले मानव अंग तस्करी रैकेट का मुख्य सरगना रहा है।

● विभिन्न अदालतों द्वारा उसे सात मामलों में उम्रकैद और एक मामले में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

वर्ष 2023 में जब वह पैरोल पर जेल से बाहर आया, तो कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया।
पुलिस की पकड़ से बचने के लिए उसने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली, पहनावा बदल लिया और हमारे ग्रामीण समाज की सबसे बड़ी कमजोरी—’धार्मिक आस्था और अंधभक्ति’—को अपनी ढाल बना लिया।

आश्रम की आड़ में ‘मौत की दुकान’ और भोली जनता का संहार
वीडियो रिपोर्ट में स्थानीय ग्रामीणों, पीड़ितों और चश्मदीदों के बयानों से जो तथ्य छनकर सामने आए हैं, वे यह समझने के लिए पर्याप्त हैं कि कैसे यह हत्यारा हमारी अज्ञानता का फायदा उठा रहा था

  1. पवित्र परिसर में अवैध अस्पताल
    मंदिर के ठीक पीछे, परिक्रमा पथ से सटे हिस्से में उसने बकायदा तख्त, बेड, ड्रिप और गैस सिलेंडर लगाकर एक अवैध क्लिनिक खोल रखा था।

वह वहां बिना किसी वैध चिकित्सा डिग्री के गंभीर मरीजों को भर्ती करता था।

  1. मासूम जिंदगियों का अंत
    गांव के ही एक बुजुर्ग पिता हरिनारायण सैनी ने रुंधे गले से बताया कि उनके इकलौते 38 वर्षीय जवान बेटे को इलाज के नाम पर इस ढोंगी ने कई दिनों तक बंधक जैसी स्थिति में भर्ती रखा, हजारों रुपये ऐंठे और अंततः गलत दवाओं के कारण उस युवक ने तड़प-तड़प कर वहीं दम तोड़ दिया। इसी तरह एक स्थानीय शिक्षक के भाई ज्ञानदेव मीणा की भी इसी परिसर में ग्लूकोज चढ़ाने के मात्र आधे घंटे के भीतर संदेहास्पद मृत्यु हो गई थी।
  2. अंग तस्करी की गहरी आशंका
    ग्रामीणों को अब यह गहरा अंदेशा सता रहा है कि इलाज और पथरी निकालने के नाम पर कहीं उनके परिजनों की किडनियां तो नहीं निकाल ली गईं। यही नहीं, पकड़ा जाने से ठीक पहले वह कातिल वहां एक ‘वृद्धाश्रम’ के निर्माण की अंतिम तैयारी में जुटा था, ताकि असहाय और लावारिस वृद्धों को आश्रय देने के बहाने वह अंग तस्करी के अपने पुराने और काले कारोबार को दोबारा पैर पसारने का मौका दे सके।

बहुजन समाज के लिए आत्मनिरीक्षण का समय सजग रहें, तार्किक बनें एक सामाजिक-आर्थिक चिन्तक और विचारक के रूप में, मैं अपने बहुजन समाज के प्रत्येक भाई, बहन और युवा से कुछ अत्यंत तीखे परंतु आवश्यक वैचारिक प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

जब तक हम इन सवालों से कतराते रहेंगे, तब तक देवेंद्र शर्मा जैसे ‘डॉक्टर डेथ’ हमारी आस्था और अज्ञानता का सौदा करते रहेंगे।

  1. चिकित्सालय और देवालय का अंतर समझें
    वीडियो में एक स्थानीय युवा ने अत्यंत तार्किक बात कही: यह मंदिर है, मंदिर में मेडिकल और चिकित्सा का क्या काम?

अगर बीमार हैं तो अस्पताल जाइए, किसी ढोंगी साधु के पास क्यों?

हमारा समाज अक्सर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और योग्य डॉक्टरों के पास जाने के बजाय, चमत्कार और भस्म-बूटी के झांसे में आकर अपनी संचित पूंजी और जान दोनों गंवा बैठता है।

याद रखिए, शारीरिक व्याधियां विज्ञान और सही दवाओं से ठीक होती हैं, पाखंडी के प्रवचनों से नहीं।

  1. ‘धार्मिक आडंबर’ को अपनी कमजोरी न बनने दें
    इस शातिर अपराधी ने केवल अपना हुलिया बदला, हाथ में पोथी ली, दीवारों पर श्लोक लिखे और पूरा गांव उसके सामने नतमस्तक हो गया।

आज के दौर में अपराधियों के लिए ‘धार्मिक चोला’ सबसे सुरक्षित और आसान पनाह गाह बनता जा रहा है।

किसी के माथे के तिलक, बदन के वस्त्र या मीठी धार्मिक वाणी को देखकर उसे महात्मा या सन्त मान लेना हमारी सबसे बड़ी बौद्धिक पराजय है।

किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक प्रमाणों और आचरण से होना चाहिए।

  1. स्थानीय प्रबंधकों और कमेटियों की जवाबदेही तय हो
    रिपोर्ट से यह भी संकेत मिले हैं कि मंदिर कमेटी के कुछ प्रभावशाली लोगों ने बिना किसी पृष्ठभूमि की जांच किए इस भगोड़े अपराधी को न केवल शरण दी, बल्कि उसके लिए चंदा इकट्ठा कर निर्माण भी करवाया।

यहाँ तक कि पुलिसिया कार्रवाई के बाद वहां के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर और हिसाब-किताब की ‘नीली डायरी’ के गायब होने की बातें भी सामने आ रही हैं।

यह इस बात का प्रमाण है कि ऐसे पाखंडी अकेले काम नहीं करते, इन्हें समाज के ही कुछ स्वार्थी और रसूखदार तत्वों का मौन या सक्रिय संरक्षण प्राप्त होता है। हमें अपने गांवों में ऐसी व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठानी होगी।

वैचारिक संदेश एवं महा-आह्वान
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।

अपने भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण पैदा करो क्योंकि अंधविश्वास मानसिक गुलामी की पहली सीढ़ी है।— बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर

बाबासाहेब ने हमें हमेशा तर्क और विज्ञान की राह पर चलने की प्रेरणा दी थी।

आज हमारा बहुजन समाज आर्थिक रूप से सुदृढ़ न होने के कारण और लचर सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की वजह से अक्सर इन झोलाछाप कातिलों के जाल में फंस जाता है।

इस मंच से मेरी संपूर्ण समाज से पुरजोर अपील है

● अस्पताल चुनें, बाबा का आश्रम नहीं
परिवार में बीमारी के समय केवल और केवल प्रमाणित डॉक्टरों (MBBS/MD) या सरकारी चिकित्सालयों की शरण लें।

झाड़-फूंक और ढोंगियों की पुड़िया आपकी जिंदगी छीन सकती है।

● अंधभक्ति का पूर्ण परित्याग करें
अपने गांव, मोहल्ले या परिसर में किसी भी अज्ञात बाहरी व्यक्ति को ‘चमत्कारी बाबा’ के रूप में स्थापित न होने दें। उसकी नागरिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाएं।

● भयमुक्त होकर आवाज उठाएं
यदि आपके आस-पास कोई ऐसा संदिग्ध कृत्य, अवैध क्लिनिक या पाखंड का केंद्र संचालित हो रहा हो, तो बिना डरे तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचित करें।

आइए, इस हृदयविदारक घटना से एक बड़ा सबक लें।

अपनी चेतना को जागृत करें, अंधविश्वास की बेड़ियों को काटकर फेंकें और एक शिक्षित, तार्किक एवं सुरक्षित बहुजन समाज का निर्माण करें

सजग रहें, सुरक्षित रहें, वैज्ञानिक बनें!

सन्दर्भ
● वीडियो स्रोत: न्यूज़ 18 इंडिया (News18 India) – आधिकारिक यूट्यूब चैनल

● वीडियो शीर्षक
मौत की दुकान चला रहा था मंदिर के पीछे ‘संत’ | Doctor Death | Dausa | Rajasthan News | Crime

● वीडियो लिंक: https://youtu.be/SqAAAGDw_fU

● घटना स्थल: रामेश्वर धाम आश्रम, गुड़ा कटला (बांदीकुई के पास),
जिला-दौसा, राजस्थान।

अस्वीकरण
यह लेख पूर्णतः साझा किए गए यूट्यूब वीडियो (न्यूज़ 18 इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट) में दिखाए गए तथ्यों, स्थानीय निवासियों व पीड़ितों के साक्षात्कारों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न्यायिक व पुलिस रिकॉर्ड्स पर आधारित है।

इस लेख का उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय, या वास्तविक आध्यात्मिक संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना कतई नहीं है, बल्कि समाज में चिकित्सा के नाम पर पनप रहे आपराधिक पाखंड, झोलाछाप संस्कृति और अंधविश्वास के प्रति जन-जागृति फैलाना है। लेखक का उद्देश्य समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना और नागरिकों को सुरक्षा के प्रति सचेत करना है।

लेखक
सोहन लाल सिंगारिया
सामाजिक आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर राजस्थान
94622-60179

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