बाकोलिया बने पुनः रेगर महापंचायत के अध्यक्ष
सरदारशहर। रेगर बस्ती स्थित गंगा माता मंदिर में रेगर महापंचायत की बैठक आयोजित की गई, जिसमें नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से पोकरमल बाकोलिया को एक…
“मेघवाल समाज पीछे क्यों रह गया? — एक आत्ममंथन और दिशा निर्धारण”
वर्तमान समय में समाज और राजनीति का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज हर वर्ग, हर जाति और हर समुदाय अपने हितों की सुरक्षा और विस्तार के लिए अवसरों…
समाज सुधार का दीप जलाया,अंधियारे को दूर भगाया।कुरीतियों से लोहा लेकर,मानवता का मान बढ़ाया।
समाज सुधार का दीप जलाया,अंधियारे को दूर भगाया।कुरीतियों से लोहा लेकर,मानवता का मान बढ़ाया। नशा-मुक्त समाज का सपना,हर जन तक आपने पहुँचाया।मृत्यु भोज, नशा-पत्ता जैसेकुप्रथाओं को जड़ से मिटाया। शिक्षा…
धर्मयुद्ध
हे भारत के नागरिकों!देश तभी वास्तविक रूप से आज़ाद और सम्मानित होगा, जब उसके नागरिक मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से स्वतंत्र हों। जब नीचता, घृणा, शोषण, अत्याचार और कुकर्म…
कवि प्रभु हठीला बिच्छुदड़ा का किया सम्मान
नव उदय पब्लिकेशन की ओर से आयोजित संत मीरा बाई नव उदय साहित्यिक व सांस्कृतिक सम्मान2025 जयपुर में साहित्य संगोष्ठी में प्रभु हठीला ने ऑनलाइन प्रतिभागी के रूप में भाग…
विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने पुत्र के विवाह-अवसर पर डॉअंबेडकरछात्रावास निर्माण में दिया 5 लाख रुपए का आर्थिक सहयोग
बीकानेर । खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल के सुपुत्र विदित की शादी दारासिंह तंवर (XEn, PHED) की सुपुत्री हर्षिता संग 2 फरवरी को लक्ष्मी निवास पैलेस, बीकानेर मे संपन्न हुई।…
सामाजिक दबाव, मानसिक तनाव और संस्थागत अड़चनों के बावजूद SC/ST छात्रों की सफलता की कहानी !!
1– 2004–2009 — पहला कदम: सपना, दल और संघर्ष की शुरुआत जब 2004 और 2009 के बीच मनिष, राजेंद्र, विशाल और उनके साथी जैसे 35 युवा SC/ST छात्रों ने वर्धमान…
“क्या भारत का प्राइवेट सेक्टर नवाचार का इंजन है या सिर्फ मुनाफे की मशीन बन चुका है आज”??”
भूमिकाभारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने का सपना अक्सर उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट जगत की चमकती कहानियों से जोड़ा जाता है। हमें बार-बार बताया जाता है कि प्राइवेट सेक्टर ही इनोवेशन…
संविधान का वादा बनाम ज़मीनी हक़ीक़त — विश्वविद्यालयों में टूटता भरोसा, बढ़ती खामोशी!
भूमिका29 जनवरी 2026 कई विद्यार्थियों के लिए कैलेंडर की तारीख नहीं, टूटे भरोसे की चुभन बनकर लौटी। जिन नियमों से कैंपस में बराबरी की हल्की-सी रोशनी आई थी, उन पर…
शोर के दौर में शख़्सियत की असली ताक़त: सात सामाजिक नियम जो ज़िंदगी बदल देते हैं!
समाज हमें पढ़ाई, नौकरी और प्रतिस्पर्धा सिखाता है, लेकिन असली जीवन जीने के सामाजिक उसूल (सिद्धांत) कोई किताब नहीं सिखाती। रिश्तों, प्रतिष्ठा और व्यवहार की दुनिया में कुछ अनकहे नियम…
