समय बड़ों चतूर,टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
लिलाट आखां दिनीं दोय, पढ़ाई बिनां लागों अन्धा।
लिखियोडां आखर जाणौं कोनी,भटकट फिरोथे बन्धा।।
समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
थे तो थारे अणपढ़ रैहां,फिरता2 हुईं थारी दूरदशा।
थे तो थारे टाबरों पढ़ने स्कूल भेज जो, नहीं करजो थारे जैडीं दशा।।
समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
कितरो ही होवै ज्ञान टल बिन लागे नी टोरों।
कितरो होवै बल, विद्या बिना नहीं होवैं सोरों।।
समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
रूपिया टकां गिनं कोनी जाणै,रेलरी टिकट कहां मिलेलो।
हाट जावै सामान लावै,500कि नोट 5रूपिया में दें आवेलों।।
समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
जागो बुढ़िया जागो जदै सवेरों,टाबरां थे समभालों।
पाटी पौथी और थैलों,देकर टाबरां ने स्कूल भेजों।।
समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी
पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।
टाबरां ने पढ़ाओ कालै नाम करसी रौसन तूम्हारो।
कहें टीकम ढुंढा वालों, फ़िर थे कयौं।बनाऔ बहानों।।

लेखक
टीकमचंद मंशा राम जी
आदर्श ढूंढा कवास बाड़मेर (राजस्थान) 344035
फोन नंबर 9414972123
