एक साँप,एक बढ़ई की औजारों वाली बोरी में घुस गया। घुसते समय बोरी में रखी हुई बढ़ई की आरी उसके शरीर में चुभ गई जिससे उसके शरीर में कई घाव हो गए,जिससे उसे दर्द होने लगा और वह विचलित हो उठा।

उसका क्रोध इतना बढ़ गया कि वह फुंफकारने लगा और गुस्से में उसने उस आरी को अपने दोनों जबड़ों में जोर से दबा दिया। स्वाभाविक है कि जब तीक्ष्ण दांतों वाली को जबड़े में कसकर पकड़ेंगे तो नुकसान तो होना ही है। अब उसके मुख में भी घाव हो गया और खून निकलने लगा। अब इस दर्द से परेशान होकर साँप ने उस आरी को सबक सिखाने के लिए अपने पूरे शरीर को उसके ऊपर लपेट लिया और पूरी ताकत के साथ उसको जकड़ लिया। इस से उस साँप का सारा शरीर जगह जगह से कट गया और वह मर गया।ठीक इसी प्रकार कई बार हम तनिक सा आहत होने पर आवेश में आकर सामने वाले को सबक सिखाने के लिए अपने आप को अत्यधिक नुकसान पहुंचा देते हैं,जिससे हमें शारिरिक, मानसिक,आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कुछ लोग छोटी-छोटी बातों पर इतने क्रोधित हो जाते हैं कि वे बहुत बड़े गलत कदम उठा लेते हैं, यहाँ तक आत्महत्या तक कर लेते हैं।
शिक्षा:-
क्रोध पागलपन की निशानी है,इससे हानि और पछतावे के अतिरिक्त कुछ भी प्राप्त नहीं होता।

(मास्टर भोमाराम बोस बालोतरा 9829236009)
