दुसरांरीं होड़ आपानें नहीं कर नीं है।
बण पावैंउतरों ही काम करनों है
जावां कठैई तो अणफाबतों नीं बोंलनो है
अकला भार ऊंट ही छोड़े मतीरा रों भारों नीं बनधणो हैं।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।
बन पाये उत्तरों काम करनो है।।
जहां सूई आवें काम वहां तलवार रों भाव नी पूछनों है।
पड़ोस में गेहूं दलैं तो आपानें कांकरा रों दलियौ नी दलनोंं है।।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।बन पाये उत्तरों ही काम करनों है।।
अपनीं गुदड़ी हों उता ही पैर पसारना है।
घटा उपडीं देखं अपनीं मटकीं रों पानीं नहीं गेरनों है।।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।
बन पाये उत्तरों ही काम करनों है।
कुकुर को काम खर करें तों बैमतलब मार खानीं है।
हाथी की अमबाडीं गंधें पर लादींतोअपनी हसीं उडानीं है।।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।
बन पाये उत्तरों ही काम करनों है।।
जावां कठैई तो मूंछ माथैं चावल नी रखनों है।
जिस घर मान सम्मान नहीं उण घर नीं जावणों है।।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।
बन पाये उत्तरों ही काम करनों है।।
दरवाजे से दूर निनमेन नहीं चालानों है।
बिरबल वाली खिचड़ी नहीं आपानें पकानीं है।।
दुसरो री होड़ आपानें नींकरनीं है।
बन पाये उत्तरों ही काम करनों है।।
अपनों ज्ञान बनदरीयां के कान में नहीं कैहनों है।
कहें टीकम ढुंढा वाला आपाने लोग दिखावोंनीं नी करनो हैं।।


लेखक
टीकमचंद मंशा राम जी।।
आदर्श ढूंढा कवास बाड़मेर राजस्थान।।
पिन 344035
फोन नंबर 9414972123

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