मरुधरा राजस्थान के सांचौर जिले के जिला मुख्यालय के पास शिवनाथपुरा कोलोनी में श्री गणेश शिव मठ स्थित है जो श्रद्धालुओं भक्तों के लिए आस्था एवं श्रद्धा का मुख्य केंद्र है। इस मठ की स्थापना श्री श्री 1008 शिव नाथ जी महाराज ने विक्रमी संवत 2013 ( सन् 1956) में की थी । इस मरुधरा की पावन धरा पर अनेकों तपस्वीयों , योगियों , महात्माओं ने जन्म लिया है । इसी मरुधरा की सांचौर तहसील के टीटोप गांव में विक्रमी संवत 1981 (सन् 1924) में पिता देवाराम एवं माता चुन्नी देवी की कोख से एक अलौकिक दिव्य आत्मा ने जन्म लिया जिनका बचपन का नाम भूराराम जी था। आप अपने पांच भाइयों और एक बहीन में दूसरे नंबर की संतान थे। आपके पिता देवाराम जी खेती कार्य करतें एवं भगवान भक्ति से प्रेम करते थे। अपने परिवार के संस्कारों से प्रभावित भुरा राम जी का मन भी भगवान भक्ति की ओर आकर्षित होने लगा और एक दिन 12 वर्ष की उम्र में ही आप घर परिवार छोड़ कर आबुराज की पहाड़ियों में चलें गये और वहां घोर विकट वन जंगली जानवरों की डरावनी आवाजों के बिच बिना भय के धैर्य और साहस के साथ ध्यान में लिन हो गये एवं जीवन कठोर तपस्या में लगा दिया लगभग 12 वर्ष की कठोर तपस्या योग के बाद आपको वास्तविक ज्ञान हो गया और उस परम् सत्य को प्राप्त कर लिया तथा वे गांव गांव भ्रमण करते हुए एक महान तपस्वी ज्ञान नाथ जी से मिलना हुआ और भुरा राम जी ने ज्ञान नाथ जी को अपना गुरु बनाया तब तपस्वी जी ने आपका नाम भुरा राम जी से शिवनाथ जी रख दिया । योगी राज शिवनाथ जी‌ विक्रमी संवत 2013 (सन् 1956) को भ्रमण करते हुए सांचौर की धरा पर पधारे और इस मठ की स्थापना की। इस कस्बे का नाम शिवनाथ पुरा भी योगीराज शिवनाथ जी के नाम पर रखा गया है। इस मठ में अपने तपोबल एवं योग साधना के बल पर जन कल्याण एवं समाज सुधार के कार्यों को करना आरंभ कर दिया साथ ही आप जड़ी बूटियों एवं आयुर्वेद के महान जानकार थे जिससे अनेकों लोगों की असाध्य बिमारियों का ईलाज भी करते थे और असंख्य लोगों के दुखों का निवारण किया। आपने इसी मठ में भक्तों श्रृद्धालुओं के सहयोग से सन 1966 में शिव मंदिर का निर्माण करवाया तथा आपकी यशोकिर्ती दुर दुर तक फैलने लगी और मठ में श्रृद्धालुओं का हमेशा तांता लगा रहता है।
फाल्गुन शुक्ल छठ 1994 को आप पंच तत्वों में विलीन हो गए,एवं परम् श्रद्धेय गणेश नाथ जी महाराज इस मठ के गादीपति बने। वर्तमान में इस मठ को श्री गणेश शिव मठ शिवनाथपुरा सांचौर के नाम से जाना जाता है और इस मठ के वर्तमान गादीपति महंत श्री गणेश नाथ जी महाराज है। मठ के परिसर में ब्रह्मलीन योगीराज श्री श्री 1008 श्री शिवनाथ जी महाराज का समाधी मंदिर, भव्य शिव मंदिर, बाबा रामदेव जी मंदिर, संत शिरोमणी रविदास मंदिर बनें हुए हैं। हरे भरे लहलहाते पेड़ पौधे मठ के परिसर की शोभा को ओर बढा देते हैं । महंत जी लगातार समाज में शिक्षा की अलख जगाने का कार्य कर रहे हैं। महंत जी के शिक्षा के लिए किए गए कार्यों के बारे में बताएं तो महंत जी के द्वारा वर्तमान में तीन छात्रावासों एवं एक श्री गणेश शिव विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इन छात्रावासों में करीबन 250 छात्र अपना अध्ययन कर रहे हैं और इन छात्रावासों से गुरु जी की कृपा से प्रतिवर्ष कईं विद्यार्थी अपना अध्ययन कर सरकारी नौकरी में लगते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में गुरु देव श्री गणेश नाथ जी महाराज लगातार मेहनत करते रहते हैं अभी हाल में भी मठ परिसर में एक आलिशान लाइब्रेरी के भवन निर्माण का कार्य चालू है जिसकी छत भराई का कार्य 12 मई को हुआ है वर्तमान में इस मठ की रौनक देखें तो कुछ अलग ही नजर आती है। समाज में लम्बे समय से चली आ रही मृत्यु भोज जैसी कुरुतियों को जड़ से खत्म करने का प्रयास महंत जी लगातार करते रहे हैं और आज यह स्थिति है कि समाज से मृत्यु भोज जैसी कुरुती बिल्कुल समाप्त हो गई है। महंत जी जहां भी जाते नशे का सदैव विरोध करते हुए नजर आते हैं। महंत जी का एक एक विचार मानवतावादी दृष्टिकोण से भरा हुआ दिखाई देता है। महंत जी सदैव बाहरी दिखावे और आडंबरों से दूर ही रहते हैं।।
इस मठ के वर्तमान मठाधीश परम् श्रद्धेय महंत श्री श्री 1008 श्री गणेश नाथ जी महाराज के जीवन परिचय के बारे में बताऊं तो
आपका जन्म गुजरात राज्य की धानेरा तहसील के आकोली गांव में सन 1964 में पराङीया गौत्र के मेघवाल परिवार में हुआ। पिता का नाम श्री मेघा राम जी पराङीया व माता का नाम श्रीमती नवु बाई था ।
आप चार बहनों व दो भाइयों में पांचवें नंबर की संतान हैं आपका बचपन का नाम सुरताराम था ।
आप परिवार में लाड प्यार से पलकर बड़े हुए । पिताजी गांव में ही कृषि कार्य करते थे और दूसरे भाई बहन भी कृषि कार्य में अपने पिताजी की मदद करते थे ।
आप पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहते थे आप कुशाग्र बुद्धि खेलकूद में भाग लेना अनेक गतिविधियों के रहते हुए भी गांव से पांचवी कक्षा उत्तीर्ण की और निकट ही के गांव झात में प्रवेश लिया झात गांव से आपने सातवीं कक्षा उत्तीर्ण की। आप बचपन से ही धार्मिक पुस्तकें पढ़ने , साधु संतों की वाणी , भजन कीर्तन सुनने में रुचि रखते थे । झात गांव से सातवीं कक्षा अव्वल अंकों से उत्तीर्ण करने के पश्चात पालनपुर में आठवीं कक्षा में प्रवेश दिलाया गया और दसवीं कक्षा में आपने उस समय विज्ञान संकाय में प्रवेश लिया और दसवीं कक्षा श्रेष्ठ अंकों से आपने उत्तीर्ण की । ग्यारहवीं कक्षा में अध्ययन करते करते समय पालनपुर जाने के लिए केवल एक ही बस आती थी और वो भी भाडली गांव तक और यह भाडली गांव अपने गांव आकोली से 10 किलोमीटर दूर पड़ता है । तो ऐसे में आकोली से भाडली तक पैदल जाना पड़ता था । फिर वहां से बस से पालनपुर तक जाना होता था और एक दिन भाडली से पालनपुर जाने वाली बस निकल गई तो आप भाडली गांव के निकट ही एक गांव धानेरी पड़ता है जहां पर भी पालपुर के लिए एक बस आती थी । तो आप धानेरी गांव तक जाने के लिए पैदल ही रवाना हो गए तब रास्ते में एक दिव्य आभा से सुशोभित महान साधु मिल गए और उन्होंने आपको भक्ति और ज्ञान का मार्ग बताया तब से आपका मन भक्ति में लग गया और आप पढ़ाई छोड़ कर गांव में ही अलग कुटिया बनाकर भक्ति करने लग गए। कुछ समय बाद आप अपने गांव आकोली से 6 किलोमीटर दूर गांगूवाड़ा गांव पड़ता है के समीप के घन घोर भयानक जंगल में जाकर पहाड़ की एक गुफा में धूणी लगाकर तपस्या करने लग गए और ऐसे में लगभग डेढ़ – दो साल इस कुटिया में रहे और एक दिन अपने अंतर्मन में विचार आया कि ” गुरु बिन घोर अंधेरा है” तो ऐसे में आप गुरु की तलाश में वहां से चलकर उसी क्षेत्र में दुर एक बड़ा ” झासोर ” पहाड़ है उस पर चले गए और वहां घनघोर भयानक जंगल जिसमें बाघ , भालू जैसे खतरनाक जानवरों का बसेरा था लेकिन इसका आपके मन में कोई डर नहीं था और आप एक रात उसी पहाड़ पर ध्यान लगाकर बैठ गए और अचानक उसी दिव्य आभा से सुशोभित उस महान साधु के दर्शन हुए जो कुछ समय पहले आपको रास्ते में मिलें थे और जिन्होंने भक्ति व ज्ञान का मार्ग बताया था। उन्होंने बताया कि आप राजस्थान के सांचौर चलें जाओ और वहां एक महान योगीराज श्री शिवनाथ जी महाराज रहते हैं आप उन्हें अपना गुरु बना दो।

तब गुरुदेव श्री गणेश नाथ जी महाराज अपने परिवार के कुछ वरिष्ठ जनों को साथ लेकर सांचौर पधारे और योगीराज श्री श्री 1008 श्री शिवनाथ जी महाराज को अपना गुरु बनाया और श्री शिवनाथ जी महाराज ने गुरु दीक्षा देकर आपका नाम सुरता राम से बदल कर श्री गणेश नाथ जी रखा । आप बड़ी निष्ठा और प्रेम से शिवनाथ जी महाराज की सेवा करते रहे। और फाल्गुन शुक्ल छठ सन् 1994 में योगीराज श्री श्री 1008 श्री शिवनाथ जी महाराज के पंच तत्वों में विलीन हो जाने के बाद आप इस मठ के महंत बनें और समाज के उत्थान में लग गए समाज उत्थान के लिए महंत जी ने शिक्षा को सबसे उपयोगी माना और समाज में शिक्षा की अलख जगाने के प्रयास में दिन-रात लगा दिए। और गुरु देव जी की कठोर मेहनत ने समाज को शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया है। महंत जी द्वारा समाज उत्थान के लिए किए गए कार्यों के बारे में इस लेख में ऊपर वर्णन किया गया है।

वर्तमान में महंत श्री श्री 1008 श्री गणेश नाथ जी महाराज के सानिध्य में शिष्य बलदेव नाथ जी सेवा एवं ज्ञानार्जन कर रहे हैं। बलदेव नाथ जी का जन्म सांचौर के निकट ही स्थित पांचला गांव में परमार गौत्र के मेघवाल परिवार में 15 जुलाई सन् 1991 को हुआ। आपके पिता का नाम श्री मसरा राम जी व माता जी का नाम श्रीमती सुआ देवी है। आपके बचपन का नाम बलवंता राम था। आप चार भाई और एक बहिन में तीसरे नंबर की संतान हैं। आपने अपने ही गांव के स्थानीय विद्यालय से 10वीं कक्षा पास की और आप उच्च शिक्षा के लिए सांचौर आ गये। महंत जी द्वारा संचालित छात्रावास में रहकर सांचौर के सरकारी विद्यालय से आपने विज्ञान वर्ग में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की और सांचौर में ही एक निजी महाविद्यालय से आपने B.Sc. उत्तीर्ण की और उसके बाद आपने B.Ed. की डिग्री प्राप्त की और आपने पांच छः साल तक निजी विद्यालयों में अध्यापन कार्य करवाया और सन 2021 में आप महंत श्री गणेश नाथ जी महाराज के विचारों और कार्य क्षेत्र से प्रभावित होकर महंत जी से दीक्षा ग्रहण कर ली। अभी वर्तमान में आप आश्रम में बहुत ही निष्ठा और प्रेम से सेवा कर रहे हैं।

        बलदेव नाथ 
   श्री गणेश शिव मठ शिवनाथपुरा सांचौर

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