किस चमत्कार के पीछे पडे हो।

कहां होना था, बिना होश के
कहां खडे हो।।

क्या विकाश करेगी
किसी सांचे मे ढली हूई शिक्षा।

भय अंधकार नफ़रत के सिवाय
पाया क्या है आज तक।।

निकलो बाहर
गुलाम बने रहने की
पिजरें वाली शिक्षा से।

जहां अंत नही, हो अथाह
बढो उस और
नही हो कोई छोर।

मत करो चिंता
आलतु फालतु की।।

आज की चिंता अभी करो।
खुद की चिंता क्या कम है।।

करो निपटारा विवादों का अभी,
कल पर छोड कर मत जाना।
कल आये,ना आये।।

जियो होश पूर्वक ।
आप हे तो है सब कुछ।।

मदन सालवी ओजस्वी
स्वतंत्र लेखक भारतीय मिशन मिडीया भारत
95888-32673

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