प्रधान मंत्री जी की अपील पर आज जो नेता और अधिकारी ईंधन बचाने तथा सादगी अपनाने का दिखावटी प्रयास कर रहे हैं, यदि वही सोच और व्यवहार सामान्य जीवन में भी निरंतर दिखाई दे, तो यह दिखावा भी देश विकास के हित में एक सकारात्मक उदाहरण बन सकता है।
ऊर्जा, पानी और प्राकृतिक संसाधनों की बचत केवल किसी विशेष अभियान या अवसर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन का स्थायी संस्कार बनना चाहिए।
बिजली की अनावश्यक बर्बादी, पानी का दुरुपयोग, अत्यधिक ईंधन खर्च और प्रदर्शन की संस्कृति अंततः देश की आर्थिक एवं पर्यावरणीय व्यवस्था पर बोझ बनती है। सच्ची जिम्मेदारी केवल भाषणों और अपीलों में नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए।
हमें समझना होगा कि —
बचाया गया ईंधन भी राष्ट्र सेवा है,
बचाई गई बिजली भी देशहित में योगदान है,
बचाया गया पानी आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा है।
यदि आम नागरिक से लेकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी तक सामान्य परिस्थितियों में भी सादगी, संयम और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनाएँ, तो देश का वास्तविक विकास संभव होगा और भारत ऊर्जा संरक्षण व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत उदाहरण बन सकेगा।✳️ ओमा राम चौहान, तकनीशियन (RGTPP), निवासी: करमावास, samdari, बालोतरा ✳️

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