“बेकार ज़ाया किया वक़्त किताबों में…सारे सबक तो कमबख़्त ठोकरों से मिले हैं…!”
*यह पंक्ति पहली नज़र में किताबों के विरुद्ध एक विद्रोह-सी लगती है। मानो जीवन का सारा ज्ञान पुस्तकालयों में नहीं, बल्कि पथरीली राहों पर बिखरा पड़ा हो। पर जब हम…
*यह पंक्ति पहली नज़र में किताबों के विरुद्ध एक विद्रोह-सी लगती है। मानो जीवन का सारा ज्ञान पुस्तकालयों में नहीं, बल्कि पथरीली राहों पर बिखरा पड़ा हो। पर जब हम…
यह एक अत्यंत गंभीर और बहुआयामी विषय है, भारतीय समाज का इतिहास केवल राजाओं और युद्धों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह विचारों के टकराव, व्यवस्था के निर्माण और उस…
प्रस्तावनावैचारिक दासता का मूल आधार”अनत्तो पाकपा निरिस्सरो”यह बुद्ध धम्म और मानवतावादी दर्शन का वह सार है जो उदघोष करता है, कि यह संसार किसी अदृश्य ईश्वर या अलौकिक शक्ति द्वारा…
खालिक की रज़ा में रज़ामंदी — समर्पण, विरक्ति और जीवन-अनुभव की पूर्ण आध्यात्मिक यात्रा। *यह शेर केवल दो पंक्तियों का काव्य नहीं, बल्कि जीवन के दीर्घ अनुभवों, टूटनों, साधना और…
भूमिका भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का संबंध माना जाता है। यह रिश्ता भरोसे, सम्मान और आपसी इज्जत (सम्मान) पर टिका होता है।…
*यह पंक्ति केवल शिकायत नहीं, बल्कि जीवनानुभव की कसक है। जब कोई व्यक्ति सलीक़े, सादगी और अदब को अपना जीवन-मंत्र बना लेता है, तो वह यह मानकर चलता है कि…
*वक़्त सबसे महँगा तोहफ़ा इसलिए है क्योंकि इसे न खरीदा जा सकता है, न संजोकर रखा जा सकता है। कोई व्यक्ति जब अपना समय हमें देता है, तो वह अपने…
हमारे देश में अब बच्चे केवल जन्म नहीं लेते, बल्कि एक परीक्षा का “अटेम्प्ट” बनकर दुनिया में आते हैं। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के…
आधुनिक बनने की होड़ में मनुष्य का रवैया (व्यवहार) अक्सर संतुलन खो देता है। आज मॉडर्निटी (आधुनिकता) को केवल बाहरी दिखावे से जोड़ दिया गया है, जबकि वास्तविक प्रगति विचारों…
बीकानेर। पंचायत बीदासरिया के मेघवाल समाज के युवाओं ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए मृत्यु भोज एवं शराब का सेवन नहीं करने की…