21वीं सदी को विज्ञान और तकनीक की सदी कहा जाता है। आज लगभग हर घर में एंड्रॉइड मोबाइल फोन मौजूद है और इंटरनेट के माध्यम से दुनिया की अधिकांश जानकारी कुछ ही सेकंड में प्राप्त की जा सकती है। यह छोटा-सा उपकरण हमारे हाथों में ज्ञान का विशाल भंडार लेकर आया है। लेकिन यह भी एक विडंबना है कि इतनी सुविधाएँ होने के बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग आवश्यक और उपयोगी जानकारी से अब भी दूर है। आज सरकारी भर्तियों की सूचनाएँ, प्रवेश परीक्षाओं के फॉर्म, छात्रवृत्ति योजनाएँ, कृषि से जुड़ी जानकारियाँ, बैंक योजनाएँ, बिजली विभाग की सूचनाएँ और अनेक सरकारी सेवाएँ सबसे पहले ऑनलाइन और सोशल मीडिया के माध्यम से उपलब्ध हो जाती हैं। कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में सर्च करके या बोलकर भी यह जान सकता है कि कौन-सी भर्ती निकली है, किस प्रवेश परीक्षा का फॉर्म भरा जा रहा है, अंतिम तिथि क्या है और परीक्षा कब होगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि लोग अपने मोबाइल का उपयोग ज्ञान और जानकारी प्राप्त करने के बजाय अधिकतर मनोरंजन के लिए करते हैं। वायरल वीडियो, रील्स और मनोरंजन की पोस्टें देखने और शेयर करने में समय तो खर्च हो जाता है, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी जुटाने की ओर उतना ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप कई बार ऐसा होता है कि किसी विद्यार्थी को प्रवेश परीक्षा या भर्ती की जानकारी तब मिलती है जब फॉर्म भरने की अंतिम तिथि निकल चुकी होती है। विशेष रूप से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों के लिए फरवरी से मई तक का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यही वह “गोल्डन टाइम” होता है जब विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे जाते हैं। यदि इस समय अभिभावक और विद्यार्थी थोड़ी-सी जागरूकता दिखाएँ, समय पर जानकारी प्राप्त करें और सही मार्गदर्शन लें, तो आने वाले दो-चार वर्षों में वही विद्यार्थी किसी अच्छे प्रशिक्षण कोर्स या नौकरी की दिशा में आगे बढ़ सकता है। लेकिन यदि यही समय अनदेखा हो जाए, तो कई बार एक पूरा साल व्यर्थ चला जाता है।
आज समाज में एक और चुनौती सामने आ रही है—भटकाव और नशे की प्रवृत्ति। कई स्थानों पर ऐसे समूह बन जाते हैं जो पढ़ने-लिखने वाले और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गलत संगति में ले जाकर उनकी दिशा बदल देते हैं। यदि कोई विद्यार्थी 12वीं के बाद एक वर्ष तक बिना लक्ष्य के भटकता रहता है, तो उसके गलत रास्ते पर जाने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए अभिभावकों का यह दायित्व बनता है कि वे अपने बच्चों के समय और दिशा पर ध्यान दें। इसके साथ-साथ आवश्यक दस्तावेजों की समय पर व्यवस्था भी बहुत जरूरी है। कई बार विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा या छात्रवृत्ति के आवेदन के समय जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, जन आधार कार्ड, आधार कार्ड या बैंक खाते की जानकारी की आवश्यकता होती है। लेकिन जब ये दस्तावेज समय पर नहीं बने होते या उनमें नाम, पिता का नाम, माता का नाम या जन्म तिथि में अंतर होता है, तब उन्हें संशोधन के लिए बार-बार ई-मित्र के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कई बार आवेदन की अंतिम तिथि भी निकल जाती है।
इसलिए बेहतर यही है कि बच्चों के स्कूली रिकॉर्ड के अनुसार सभी दस्तावेज पहले से सही बनवाए जाएँ और उनमें एक समान जानकारी दर्ज हो। इससे भविष्य में किसी भी ऑनलाइन आवेदन, प्रवेश परीक्षा या छात्रवृत्ति के फॉर्म भरने में कोई कठिनाई नहीं आएगी। आज का युग जागरूकता का युग है। दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है और जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है। यदि हमारे हाथ में मोबाइल है, इंटरनेट है और जानकारी प्राप्त करने के साधन हैं, तो हमें उनका सही उपयोग भी करना चाहिए। अभिभावकों और विद्यार्थियों दोनों को यह समझना होगा कि मोबाइल केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, जानकारी और भविष्य निर्माण का सबसे शक्तिशाली माध्यम भी है। यदि हम समय-समय पर आवश्यक सूचनाओं से अपडेट रहें, सरकारी योजनाओं और अवसरों की जानकारी प्राप्त करें और अपने बच्चों को सही दिशा दें, तो निश्चित ही उनका भविष्य उज्ज्वल बनाया जा सकता है। अंततः यही कहा जा सकता है कि आज के समय में सफलता का पहला कदम है—जागरूकता और सही जानकारी। यदि हर अभिभावक और विद्यार्थी अपने मोबाइल का उपयोग ज्ञान और अवसरों की जानकारी प्राप्त करने में करने लगे, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन बेहतर होगा, बल्कि समाज भी अधिक शिक्षित, जागरूक और प्रगतिशील बन सकेगा।

✍️ गणपत मेघवाल ,वरिष्ठ अध्यापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता ,नाड़सर ,भोपालगढ़ ,जोधपुर ,मो.9928320549
