राजस्थान के चूरू जिले का महत्वपूर्ण हिस्सा ‘सरदारशहर’ अपनी गौरवशाली संस्कृति और व्यापारिक इतिहास के लिए जाना जाता है। लेकिन आज यह क्षेत्र एक अजीब सी विडंबना का सामना कर रहा है। एक तरफ जहां दुनिया डिजिटल क्रांति और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है, वहीं सरदारशहर के स्थानीय निवासी बुनियादी सुविधाओं, भ्रष्टाचार और राजनीतिक उदासीनता की मार झेल रहे हैं।
क्षेत्र के आम जनमानस में यह धारणा घर कर चुकी है कि विकास का पहिया जाम हो चुका है और इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता है।
- विकास की गति पर ब्रेक: एक जमीनी हकीकत
सरदारशहर में प्रवेश करते ही टूटी हुई सड़कें, बदहाल जल निकासी व्यवस्था और धूल से अटे बाजार विकास के दावों की पोल खोल देते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, यहाँ कोई भी बड़ा औद्योगिक प्रोजेक्ट या रोजगार का साधन स्थापित नहीं हुआ है।
पेयजल और सिंचाई: रेगिस्तानी इलाका होने के नाते पानी यहाँ की सबसे बड़ी समस्या है, लेकिन इस पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।
शिक्षा और स्वास्थ्य: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और आधुनिक मशीनों की कमी है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को आज भी बीकानेर या जयपुर रेफर किया जाता है।
- जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: जनता की पुकार अनसुनी
सरदारशहर की राजनीति दशकों तक कुछ विशेष चेहरों और एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है। आरोप है कि सत्ता में आने के बाद जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाने के बजाय जयपुर के गलियारों तक सीमित हो जाते हैं।
जनता का मानना है कि नेताओं ने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उस प्रखरता से नहीं उठाया, जितनी जरूरत थी। जब नेतृत्व में इच्छाशक्ति की कमी होती है, तो प्रशासन भी सुस्त पड़ जाता है, जिसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है।
- भ्रष्टाचार का चरम: व्यवस्था में लगती दीमक
क्षेत्र में विकास कार्य न होने का एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार का संस्थागत होना है। सड़कों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग हो या सरकारी योजनाओं के आवंटन में बंदरबांट, हर स्तर पर बिचौलियों का बोलबाला है।
“जब बजट का एक बड़ा हिस्सा विकास के बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो क्षेत्र की तस्वीर बदलना नामुमकिन है।”
आम आदमी को अपना जायज काम करवाने के लिए भी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे जनता में भारी रोष है।
- विधायक अनिल शर्मा: विकास के ‘एग्जाम’ में विफल
भंवरलाल शर्मा के निधन के बाद उनके पुत्र अनिल शर्मा से क्षेत्र को काफी उम्मीदें थीं। सहानुभूति की लहर और पिता की विरासत के दम पर वे विधायक तो बन गए, लेकिन रिपोर्ट कार्ड फिलहाल निराशाजनक नजर आता है।
अनुभव की कमी या इच्छाशक्ति का अभाव? आलोचकों का कहना है कि अनिल शर्मा अपने पिता जैसा प्रभाव छोड़ने में विफल रहे हैं।
अधूरे वादे: चुनाव के समय किए गए वादे कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। जनता उन्हें विकास के ‘एग्जाम’ में फिलहाल ‘अनुत्तीर्ण’ मान रही है क्योंकि धरातल पर कोई क्रांतिकारी बदलाव नजर नहीं आया।
- पूर्व विधायक भंवरलाल शर्मा: विरासत पर उठते सवाल
स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा राजस्थान की राजनीति के चाणक्य कहे जाते थे। उन्होंने सात बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। लेकिन आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो एक बड़ा सवाल खड़ा होता है— क्या इतने लंबे कार्यकाल के बावजूद सरदारशहर को वह मिला जिसका वह हकदार था?
भले ही उन्होंने व्यक्तिगत संबंध बनाए और राजनीति में बड़ा कद पाया, लेकिन सरदारशहर को एक ‘आधुनिक हब’ बनाने की दिशा में उनका ध्यान भी कम ही रहा। उनकी राजनीति अक्सर सत्ता के समीकरणों को साधने में लगी रही, जिससे क्षेत्र का दीर्घकालिक विकास गौण हो गया।
- समाधान: हर बार नया चेहरा, नई उम्मीद
सरदारशहर की जनता अब बदलाव के मूड में है। क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि जब तक राजनीतिक एकाधिकार (Monopoly) खत्म नहीं होगा, विकास संभव नहीं है।
क्यों जरूरी है नया विकल्प?
जवाबदेही: जब नेता को पता होता है कि उसकी कुर्सी सुरक्षित नहीं है, तो वह काम करने को मजबूर होता है।
नई सोच: युवा और नए चेहरे आधुनिक समस्याओं (जैसे स्किल डेवलपमेंट, डिजिटल लाइब्रेरी, एग्रो-इंडस्ट्री) के प्रति अधिक जागरूक होते हैं।
भ्रष्टाचार पर लगाम: पुराने गठजोड़ टूटने से भ्रष्टाचार के नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है।
निष्कर्ष: क्या बदलेगी सरदारशहर की तकदीर?
सरदारशहर को आज एक ऐसे नेता की दरकार है जो केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र का नक्शा बदलने के लिए राजनीति में आए। विकास केवल सड़कों और ईंट-पत्थरों का नाम नहीं है, बल्कि यह आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार का नाम है।
आगामी चुनावों में जनता का फैसला यह तय करेगा कि सरदारशहर पिछड़ेपन की बेड़ियों में जकड़ा रहेगा या विकास की नई इबारत लिखेगा। वक्त आ गया है कि यहाँ की जनता भावुकता और विरासत की राजनीति को छोड़कर ‘काम के आधार पर वोट’ देने की परंपरा शुरू करे।

लेखक – गुरू धानका
महामंत्री – भाजयुमो सरदारशहर मंडल
