अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) जोधपुर में 06 लोगों ने की स्वेच्छिक देहदान की घोषणा
शरीर नश्वर है लेकिन अगर मरने के बाद भी यह किसी के काम आए तो हमें इसे दान कर देना चाहिए- देहदानी स्वामी पूर्ण प्रकाश महाराज महामंडलेश्वर

• जागो हुक्मरान न्यूज
जोधपुर | चिकित्सा,शिक्षा एवं शोध के लिए मरणोपरांत की गई देहदान मानव कल्याण के काम आ सकती है। इसी थीम पर लीला बौद्ध व ओमप्रकाश बौद्ध की प्रेरणा से दिनांक 07 जून 2025 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) जोधपुर में मानव देहदानी मैना गोदा, संगीता प्रजापत, दुर्गा देवी बौद्ध, जितेंद्र बौद्ध, हर्षित बौद्ध, हरेंद्र बौद्ध ने स्वामी पूर्ण प्रकाश जी महाराज के सानिध्य एवं समाज सेवी श्री गिरधारी लाल जी लखानी के नैतृत्व में मरणोपरांत स्वेच्छिक देहदान का संकल्प लिया।
इस अवसर पर समाज सेवी एवं भामाशाह शक्तिराज गुणपाल,समाज सेवी एवं युवा राजनीतिज्ञ इंद्रजीत मेघवाल गुड़ा, बुद्ध-फुले-अम्बेडकर विचारक जगदीश बारूपाल (जग्गू दादा), मानव देहदानी लीला बौद्ध, देहदानी ओमप्रकाश बौद्ध,देहदानी गिरधारी लखानी, मास्टर भोमाराम बोस, मिशनरी चिंतक रामकिशोर भाटी, महेंद्र मेहरा, अतुल गाँधी आदि उपस्थित रहे। मरणोपरांत अपनी देहदान का संकल्प करने वाले सभी देहदानियों का पुष्पहार पहनाकर व मुँह मीठा करवाकर अभिनन्दन किया गया तथा उन्हें शुभकामनाएं दी गई।

मानव देहदानी स्वामी पूर्ण प्रकाश जी महाराज ने बताया कि मेरी ख्वाहिश यह नहीं है कि मेरे मरणोपरांत लोग मेरी समाधि को पूजे और पूजा पाठ करें बल्कि इच्छा है कि मेरे मरने के बाद मेरी देह को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) जोधपुर में शोधार्थी चिकित्सकों के लिए काम आए। साथ ही हमने कम से कम सौ लोगों को स्वेच्छिक देहदान करवाने का संकल्प लिया है जिसमें आज तक कुल 53 लोगों ने अपनी स्वेच्छा से मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया है। सन्त कबीर ने एक वाणी में कहा है कि- “पशु चाम की बने पनिया, नौपत मढ़े नगाड़ा। नर तेरी चाम काम नहीं,बल-जल होवे अंगारा।” सन्त कबीर साहेब के इन्हीं भावों से प्रेरित होकर मानव सेवा, शिक्षा एवं पर्यावरण के साथ साथ देहदान का संकल्प लिया और लोगों को प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं।
