“खालिक की रज़ा में रहती है रज़ा मेरी,दुनियाँ तेरा तमाशा हम देख चुके है..!!”
खालिक की रज़ा में रज़ामंदी — समर्पण, विरक्ति और जीवन-अनुभव की पूर्ण आध्यात्मिक यात्रा। *यह शेर केवल दो पंक्तियों का काव्य नहीं, बल्कि जीवन के दीर्घ अनुभवों, टूटनों, साधना और…
“वंचित समाज में आर्थिक असुरक्षा और वैवाहिक रिश्तों की डगमगाती बुनियाद का कठोर सच!”
भूमिका भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का संबंध माना जाता है। यह रिश्ता भरोसे, सम्मान और आपसी इज्जत (सम्मान) पर टिका होता है।…
“सलीका़ सादगी सब आज़मा कर समझ आया,बहुत नुकसान होता है अदब से पेश आने में..!”
*यह पंक्ति केवल शिकायत नहीं, बल्कि जीवनानुभव की कसक है। जब कोई व्यक्ति सलीक़े, सादगी और अदब को अपना जीवन-मंत्र बना लेता है, तो वह यह मानकर चलता है कि…
“मुझे महँगे तोहफ़े बहुत पसंद हैं,जैसे वक़्त, मुख़लिसी, ऐतबार, इज़्ज़त और चाय।” — गुलज़ार
*वक़्त सबसे महँगा तोहफ़ा इसलिए है क्योंकि इसे न खरीदा जा सकता है, न संजोकर रखा जा सकता है। कोई व्यक्ति जब अपना समय हमें देता है, तो वह अपने…
“सशक्तिकरण बनाम रैंक की दौड़: हाशिए के समुदायों की शिक्षा की वास्तविक चुनौती!”
हमारे देश में अब बच्चे केवल जन्म नहीं लेते, बल्कि एक परीक्षा का “अटेम्प्ट” बनकर दुनिया में आते हैं। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के…
“प्रेम, विश्वास और मर्यादा की सीमाओं को लांघती असंवेदनशील मानसिकता!”
आधुनिक बनने की होड़ में मनुष्य का रवैया (व्यवहार) अक्सर संतुलन खो देता है। आज मॉडर्निटी (आधुनिकता) को केवल बाहरी दिखावे से जोड़ दिया गया है, जबकि वास्तविक प्रगति विचारों…
बीदासरिया में युवाओं ने मृत्यु भोज व शराब त्यागने की ली शपथ
बीकानेर। पंचायत बीदासरिया के मेघवाल समाज के युवाओं ने सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए मृत्यु भोज एवं शराब का सेवन नहीं करने की…
होली गीत
रंग तो लियो हाथों में होली खैलण जावां में।छोटा-मोटा मिलनें होली रों त्योहार मनाया रे।।घर घर में फागण गावां टाबरा ने ढुंढण जावां में।ढोल थाली और संग ऊपर फागण गीत…
“मेरिट लिस्ट में नाम नहीं,दोष किसे देता दुनिया को, जब कमी मेरी तैयारी में ही निकली !”
“नाम ढूँढता रहा पूरी मेरिट लिस्ट में, आख़िर में सिर्फ़ अपनी कमी मिल गई..!!” यह पंक्ति उस चुभन को व्यक्त करती है जो परिणाम के दिन हर उस अभ्यर्थी को…
“नारी को जलाना बंद करो”
कब तक जलाओगे नारी को,किस परंपरा के नाम पर?कब तक दोगे आग की शिक्षात्यौहारों के काम पर? एक स्त्री की प्रतिमा जलती है,और हम ताली बजाते हैं,फिर कहते हैं —…
