“खालिक की रज़ा में रहती है रज़ा मेरी,दुनियाँ तेरा तमाशा हम देख चुके है..!!”
खालिक की रज़ा में रज़ामंदी — समर्पण, विरक्ति और जीवन-अनुभव की पूर्ण आध्यात्मिक यात्रा। *यह शेर केवल दो पंक्तियों का काव्य नहीं, बल्कि जीवन के दीर्घ अनुभवों, टूटनों, साधना और…
