रंग तो लियो हाथों में होली खैलण जावां में।
छोटा-मोटा मिलनें होली रों त्योहार मनाया रे।।
घर घर में फागण गावां टाबरा ने ढुंढण जावां में।
ढोल थाली और संग ऊपर फागण गीत गावां में।।
होली जैडो त्योहार आयो परदेशी घर आवें रे।
भीता ऊपर कोरां फुलडां आगणीयै चोक पुराऊरे।।
बतिस भोजन बनाउ घरा में घर घर जीवण जाऊ में।
हेत प्रेम से गले मिला आपस में राजी हो वहां में।।
गुड़ फुली और मिठाईयां घर घर रीवांण करा में।
रंग बिरंगा कपड़ा पैरांऊपर रंग चढ़ावा में।।
साबड़ी फूलोरी भरी होली थानै जावां में।
गांव शहर होली दहन करां प्रहलाद ने बहार निकालो में।।
तरह तरह रो रंग गलाऊं पिस्कारी और बाल्टी से रंग डाला में।
पास उभोडां ताली दें दें हंसे कनै उभोडां ओलखो कोनी थे।।
मुडौं तो रंग में करियो कपड़ा करियां कादां में।
होली जैडो त्योहार आयो रंग लगा दिनों गाला में।।
टीकमो तो होली रा गीत लिखे सुणजो सगलां भायां थै।
उल्टा सिद्धा गीत लिखे गलती माफ़ कर दिजौ थै।।

लेखक।।
टीकमचंद मंशा राम जी।।
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