भूमिका

मानव समाज का इतिहास संघर्षों से भरा हुआ है। कोई भी वर्ग ऐसा नहीं रहा जिसने जीवन में कभी कठिनाइयों का सामना न किया हो। वंचित समाज का संघर्ष तो और भी गहरा रहा है, क्योंकि उसे सामाजिक भेदभाव, आर्थिक कमी और शिक्षा के अभाव जैसी अनेक बाधाओं से जूझना पड़ा। लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि जो समाज अपने भीतर हौसला (साहस) पैदा कर लेता है और समय के साथ प्रोग्रेस (आगे बढ़ने की प्रक्रिया) को स्वीकार कर लेता है, वही समाज अंततः सम्मान और सफलता प्राप्त करता है। इसलिए हार को नियति मान लेना समाधान नहीं है, बल्कि उस हार को जीत में बदलने की कला सीखना ही असली जागरूकता है।

  1. संघर्ष की विरासत को समझना !

वंचित समाज के सामने जो चुनौतियाँ रही हैं, वे सदियों के सामाजिक भेदभाव और अवसरों की कमी का परिणाम रही हैं। कई पीढ़ियों ने अभाव में जीवन बिताया और यही अनुभव एक कठिन विरासत के रूप में आज भी मौजूद है। लेकिन इस विरासत को केवल दुख की कहानी बनाकर रखने से समाज आगे नहीं बढ़ सकता। जरूरी है कि लोग अपने इतिहास को समझें और उससे सीख लें। लगातार शिकायत (गिला) करने के बजाय उसे प्रेरणा में बदलना चाहिए। आज का समय अवसरों का है और हर व्यक्ति अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। इसलिए समाज को डेवलपमेंट (विकास) की दिशा में आगे बढ़ने का निश्चय करना होगा।

  1. शिक्षा सबसे बड़ा हथियार

किसी भी समाज की असली ताकत उसके शिक्षित नागरिक होते हैं। यदि परिवार गरीब है, संसाधन कम हैं, तो भी बच्चों की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। शिक्षा मनुष्य को सोचने की शक्ति देती है और जीवन में नए रास्ते खोलती है। डॉ. आंबेडकर ने भी कहा था कि शिक्षा ही वह साधन है जो समाज को सम्मान दिला सकता है। इसलिए हर घर में यह संकल्प होना चाहिए कि चाहे कितनी भी कठिनाई क्यों न आए, बच्चे पढ़ाई से दूर नहीं होंगे। इल्म (ज्ञान) मनुष्य को आत्मविश्वास देता है और उसे समाज में सम्मान दिलाता है। यही कारण है कि एजुकेशन (शिक्षा) को जीवन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाना आवश्यक है।

  1. अंधविश्वास से मुक्ति !

कई बार समाज अपनी समस्याओं का कारण किस्मत, ग्रह-नक्षत्र या किसी अदृश्य शक्ति को मान लेता है। यही सोच अंधविश्वास को जन्म देती है और प्रगति के रास्ते को रोक देती है। जब तक मनुष्य तर्क और वैज्ञानिक दृष्टि नहीं अपनाता, तब तक वह आगे नहीं बढ़ सकता। समाज को यह समझना होगा कि हर समस्या का समाधान ज्ञान और विवेक से निकलता है। इसलिए जरूरी है कि लोग हर बात को परखने और समझने की आदत डालें। इस सोच को तहकीक (जांच-पड़ताल) कहा जाता है, जो सत्य की खोज का मार्ग है। इसी के साथ साइंस (वैज्ञानिक ज्ञान) को अपनाकर समाज आधुनिकता की ओर बढ़ सकता है।

  1. सकारात्मक सोच की शक्ति !

नकारात्मक सोच मनुष्य को निराश और कमजोर बना देती है। यदि कोई समाज हमेशा यह सोचता रहे कि उसके साथ अन्याय हुआ है और आगे भी होगा, तो वह कभी प्रगति नहीं कर पाएगा। जीवन में कठिनाइयाँ हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन वही लोग सफल होते हैं जो आशा और विश्वास बनाए रखते हैं। सकारात्मक सोच कठिन परिस्थितियों में भी नए रास्ते खोजने की प्रेरणा देती है। जब मन में विश्वास होता है तो छोटे प्रयास भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। इसलिए समाज को अपने भीतर उम्मीद (आशा) को जीवित रखना होगा और जीवन के हर क्षेत्र में पॉजिटिविटी (सकारात्मकता) को अपनाना होगा।

  1. मेहनत और आत्मविश्वास
    सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार मेहनत है। कोई भी समाज बिना परिश्रम के आगे नहीं बढ़ सकता। वंचित समाज के पास संसाधन भले कम हों, लेकिन मेहनत करने की क्षमता हमेशा उसके पास रही है। जब मेहनत के साथ आत्मविश्वास जुड़ जाता है तो असंभव भी संभव हो जाता है। मेहनती व्यक्ति कभी हार से नहीं डरता, बल्कि उसे सीख के रूप में स्वीकार करता है। यही सोच समाज को आगे बढ़ाती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने काम में पूरी निष्ठा से लगना चाहिए। मेहनत (परिश्रम) ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है और आज के युग में कम्पटीशन (प्रतिस्पर्धा) को समझकर आगे बढ़ना जरूरी है।
  2. सरकार की योजनाओं का लाभ !

आज देश में शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के लिए अनेक सरकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाना है। लेकिन कई बार जानकारी के अभाव में लोग इनका लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए जरूरी है कि समाज के लोग जागरूक बनें और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें। छात्रवृत्ति, कौशल प्रशिक्षण, लोन योजनाएँ और रोजगार कार्यक्रम कई युवाओं का भविष्य बदल सकते हैं। यदि सही जानकारी और सही प्रयास किया जाए तो जीवन में नई दिशा मिल सकती है। इसलिए लोगों को योजनाओं की मालूमात (जानकारी) प्राप्त करनी चाहिए और उन्हें स्कीम (सरकारी योजना) के रूप में अपनाना चाहिए।

  1. रोजगार और कौशल विकास !

आज का समय केवल डिग्री का नहीं बल्कि कौशल का भी है। यदि किसी व्यक्ति के पास कोई विशेष हुनर है तो वह आसानी से रोजगार प्राप्त कर सकता है या स्वयं का काम शुरू कर सकता है। तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करते हैं। इसलिए युवाओं को नई तकनीक सीखने और अपने कौशल को विकसित करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। समाज के युवाओं को यह समझना होगा कि समय के साथ बदलना ही सफलता की कुंजी है। जब व्यक्ति अपने भीतर हुनर (कौशल) विकसित करता है तो उसके लिए कई रास्ते खुल जाते हैं। यही कारण है कि स्किल (कौशल प्रशिक्षण) का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

  1. अतीत की कटुता भूलना !

इतिहास में समाज ने कई प्रकार के भेदभाव और अन्याय का सामना किया है। यह एक सच्चाई है जिसे नकारा नहीं जा सकता। लेकिन केवल अतीत की पीड़ा को याद करते रहना भी प्रगति में बाधा बन सकता है। समाज को अपने अनुभवों से सीखते हुए आगे बढ़ना होगा। यदि मन में लगातार क्रोध और द्वेष बना रहेगा तो व्यक्ति अपने लक्ष्य से भटक जाएगा। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने मन से नकारात्मक भावनाओं को दूर करें। जब मन साफ होता है तो सोच भी स्पष्ट होती है। इसलिए नफरत (द्वेष) को छोड़कर फ्यूचर (भविष्य) की ओर देखना ही समझदारी और प्रगति का मार्ग है।

  1. समाज को कोसने से नहीं, कर्म से बदलाव !

अक्सर लोग अपनी असफलताओं के लिए समाज, व्यवस्था या सरकार को दोष देते हैं। लेकिन केवल शिकायत करने से कोई परिवर्तन नहीं होता। परिवर्तन तभी आता है जब व्यक्ति स्वयं अपने जीवन की जिम्मेदारी लेता है और कुछ नया करने का साहस करता है। समाज का विकास व्यक्तिगत प्रयासों से ही संभव होता है। जब लोग अपने कर्तव्यों को समझते हैं और ईमानदारी से काम करते हैं तो धीरे-धीरे पूरी व्यवस्था में बदलाव दिखाई देता है। इसलिए जरूरी है कि हर व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक कदम उठाए। अपनी जिम्मेदारी (उत्तरदायित्व) को समझते हुए ठोस एक्शन (कार्यवाही) करना ही वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत है।

  1. बदलाव को स्वीकार करना

समय हमेशा बदलता रहता है और जो समाज समय के साथ बदलना सीख जाता है, वही आगे बढ़ता है। जो लोग पुराने विचारों में ही अटके रहते हैं, वे पीछे रह जाते हैं। इसलिए वंचित समाज को इंकलाब (परिवर्तन) की भावना अपनानी होगी और अपडेट (नवीनता के साथ स्वयं को ढालना) की मानसिकता विकसित करनी होगी।

समापन

इतिहास इस बात का साक्षी है कि कोई भी समाज हमेशा के लिए पराजित नहीं रहता। परिस्थितियाँ बदलती हैं और अवसर भी बदलते हैं। जरूरत केवल इतनी है कि समाज अपने भीतर इरादा (दृढ़ संकल्प) पैदा करे और आधुनिक युग की अपॉर्च्युनिटी (अवसर) को पहचान कर उनका उपयोग करे। यदि वंचित समाज शिक्षा, मेहनत, सकारात्मक सोच और सामाजिक एकता को अपना ले, तो कोई भी शक्ति उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती।

प्रेरक शेर

चल पड़े हैं जो उजालों की तरफ हौसला लेकर,
वही लोग वक्त की राहों में मुकद्दर लिखते हैं।

संकलन कर्ता हगामी लाल मेघवंशी, रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर, आध्यात्मिक और सामाजिक चिंतक। 9829 2 30966

स्रोत एवं संदर्भ
आंबेडकर विचार, संविधान, सामाजिक अध्ययन, शिक्षा रिपोर्ट, सामान्य ज्ञान.

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