मैं पैंतीस वर्ष का एक साधारण युवक हूँ। जीवन की इस अवस्था में जब अधिकतर मित्र अपनी-अपनी गृहस्थी में रच-बस गए हैं, मैं अब भी प्रतीक्षा में खड़ा हूँ। कभी-कभी दिल में हल्की सी खलिश (अंतरपीड़ा) उठती है, पर मैं इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने देता। मेरे भीतर एक स्पष्ट विजन (दृष्टि) है कि विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि आत्माओं का संगम है। यदि वह मेरे जीवन में आएगी तो मैं उसे केवल वस्तुएँ नहीं, बल्कि अपना विश्वास और समर्पण दूँगा!
लोग पूछते हैं—अब तक शादी क्यों नहीं हुई? मैं मुस्कुरा देता हूँ। शायद तक़दीर को अभी कुछ और समय चाहिए। भीतर एक आरज़ू (गहरी इच्छा) है कि जब भी वह आए, उसे मेरे जीवन में किसी तरह की कमी महसूस न हो। मैं अपने जीवन को स्थिर करने में लगा हूँ, अपने करियर (व्यवसायिक जीवन) को सँवार रहा हूँ, ताकि उसके सपनों को भी सहारा दे सकूँ। विवाह मेरे लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व है।
यदि वह पायल पहने तो मैं उसकी हर आहट को अपनी धड़कन बना लूँगा। उसका हर कदम मेरे घर की रौनक होगा। मैं उसे आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक ठोस प्लानिंग (योजनाबद्ध तैयारी) कर चुका हूँ। मेरे दिल में उसके लिए बेहिसाब मोहब्बत (सच्चा प्रेम) है, जो दिखावे की नहीं, निभाने की होगी। मैं चाहता हूँ कि वह अपने हर शौक को बिना संकोच जी सके।
वह बिंदी लगाए या न लगाए, मेरे लिए उसका चेहरा ही चाँद होगा। मैं उसके आत्मसम्मान की रक्षा करूँगा, यही मेरा कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) होगा। मेरे मन में उसके लिए एक गहरा एहसास (आंतरिक अनुभूति) है कि वह मेरी बराबरी की साथी होगी। मैं उसे निर्णय लेने की स्वतंत्रता दूँगा, क्योंकि प्रेम बंधन नहीं, विश्वास है!
यदि वह काजल लगाए तो मैं उसकी आँखों की थकान पढ़ सकूँ। जीवन की दौड़ में उसे अकेला महसूस न होने दूँ। मैं घर को केवल मकान नहीं, बल्कि एक सुरक्षित कम्फर्ट (आरामदायक स्थिति) बनाना चाहता हूँ। उसके साथ बिताया हर पल मेरे लिए एक सुकून (आत्मिक शांति) होगा। मैं उसकी हँसी में अपना दिन और उसकी चिंता में अपना दायित्व देखूँगा!
वह चूड़ियाँ खनकाए तो वह आवाज़ मेरे लिए उत्सव होगी। मैं उसके साथ मिलकर भविष्य का प्रोजेक्ट (साझा लक्ष्य) बनाना चाहता हूँ—जहाँ हम दोनों मिलकर सपनों का घर बसाएँ। मेरे भीतर उसके लिए सच्ची वफ़ा (निष्ठा) है। मैं उसे कभी यह महसूस नहीं होने दूँगा कि वह अकेली है। उसके हर संघर्ष में मैं उसका साथ निभाऊँगा!
यदि वह साड़ी पहने तो मैं उसकी सादगी की तारीफ करूँगा। मैं उसे समाज की संकीर्ण सोच से बचाने का प्रोटेक्शन (सुरक्षा) देना चाहता हूँ। मेरे मन में उसके लिए गहरी इज़्ज़त (सम्मान) है। वह चाहे नौकरी करे या घर संभाले, हर निर्णय में उसका साथ दूँगा। मेरे लिए उसका आत्मसम्मान सबसे बड़ा गहना होगा।
वह नेल पॉलिश लगाए या गुलाब का फूल, मैं उसके हर छोटे शौक को महत्व दूँगा। मैं उसके साथ जीवन का संतुलित बैलेंस (संतुलन) बनाना चाहता हूँ। मेरे भीतर उसके लिए एक सच्ची तड़प (आंतरिक व्याकुलता) है, जो उसे खुश देखने में ही शांत होगी। मैं उसके व्यक्तित्व को दबाऊँगा नहीं, बल्कि उसे और निखारने की कोशिश करूँगा!
यदि वह झुमके पहने तो उनकी झंकार में मैं अपना संगीत सुनूँगा। मैं उसके सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव सपोर्ट (सहयोग) दूँगा। मेरे दिल में उसके लिए एक अटूट जुनून (प्रबल उत्साह) है कि वह अपने जीवन में आगे बढ़े। मैं चाहता हूँ कि वह अपनी पहचान बनाए, और मैं उसके साथ गर्व से खड़ा रहूँ।
मैं जानता हूँ कि चाँद-तारे लाने की बातें केवल कल्पना हैं। पर सच्चाई यह है कि मैं उसे जीवन की स्थिरता और भावनात्मक सिक्योरिटी (सुरक्षा) देना चाहता हूँ। मेरे दिल में उसके लिए गहरी दुआ (आशीर्वाद की कामना) है। यदि वह एक बार कह दे कि उसे क्या चाहिए, तो मैं अपने अहंकार तक को त्याग दूँ। मैं उसे महंगे तोहफे नहीं, बल्कि सच्चा साथ दूँगा। यदि वह कभी चाँद देखना चाहे, तो मैं उसे आईना दिखाकर कहूँगा—तुम्हारे चेहरे की रोशनी ही मेरे जीवन का उजाला है।
मैं आज अविवाहित हूँ, पर अकेला नहीं। मेरे भीतर उम्मीद जिंदा है। जिस दिन वह आएगी, मैं उसे यह विश्वास दूँगा कि उसने केवल एक पति नहीं, बल्कि एक सच्चा साथी चुना है—जो हर हाल में उसके साथ चलेगा, बिना शर्त, बिना दिखावे, केवल प्रेम के साथ।
“कल्पना को शब्द देने वाला “

हगामी लाल मेघवंशी
रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर, आध्यात्मिक और सामाजिक चिंतक। 9829 230 966
