राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैतो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।।
काई कठै अठै जठै और बोलें काई करो थे बठै।
एंडी बोलीं सुण म्हारा भाया कहें राजस्थानी भलै आयौ अठै।।
राजस्थान संस्कृती देख लोग मानै घणी खम्मा और राम राम बोले है जावां जठै।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।
तीज राखडीं आईं मारा वीरा उनको केसै मनावा सा।
तीज रो परणयो राखडीं रो वीरों एंडी एंडी रितां राखां सा।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।।
हिंनडो बांध हिडण जावां काजल टीकी और कहीं तरह रो सिणगार सजां सा।
लेरियो ओड कंदोरो पेर माथें ऊपर रखडीं बाधां सा।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।।
राती पिली लाल सफेद और सतरंगी पगड़ी बाधा सा।
धोती पुठियौ और अढिवटो पैरा में बैडीं पैरां सा।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।।
कैर सांगरी कुबटिया री सब्जी घर घर में बनावां सां।
दाल बाटी और चूरमो बाजरे रो सोगरो में जीमां सां ।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।

भैडं बकरी ऊंट मैं राखां गाय नां माता कैवां सां
गावां खेतां में रहता प्रेम से धोरे माथै ढांणी मांडां सां।।
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।
बाजरी बावां मोकली काकड़ सिमबडीया और मतीरा में खावां सां।
सवलांफली मुगं मोठ और हाथों से पुखिया मिसलों हां
राजस्थान रंगीलो कहिजै इन्द्र धनुषरा रंग इण आगल फिका लागे सा।
मैं तो भाया हर रंग रोगियों राजस्थान रा गुण गावां सा।
सर्दी गर्मी और वर्षा बारहमासं त्यौहार मनावां सां।
कहै टीकम ढुंढा वाला मै राजस्थान रा गुण गावां सा।।


लेखक
टीकमचंद मंशा राम जी
गांव आदर्श ढूंढा कवास बाड़मेर राजस्थान पिन 344035
9414972123

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