नागौर। समता सैनिक दल जिला शाखा डीडवाना- कुचामन के तत्वावधान में आज दिनांक 26 मार्च 2026 गुरुवार को दल के मकराना स्थित कार्यालय में सम्राट अशोक की जयंती समारोह मनाया गया ।समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान प्रदेश के महासचिव ओमप्रकाश कसौटियां थे।

जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ सैनिक विकास बौद्ध की ।समारोह का प्रारंभ भगवान बुद्ध, बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर एवं मूल निवासी महापुरुषों के चित्र पर पुष्प एवं माला द्वारा किया गया ।

समारोह को संबोधित करते हुए ओमप्रकाश कांसोटिया बताया कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक की बात करते हैं तो हम केवल एक राजा को ही नहीं बल्कि एक ऐसी वैज्ञानिक सोच और मानवीय विचारधारा की बात करते हैं । जिसने भारत को विश्व गुरु के सिहांसन पर बिठाया।

आज आधुनिक भारत के प्रतीक- तिरंगे का अशोक चक्र और सारनाथ का चतुर्मुखी सिंह हमारी राष्ट्रीय पहचान के आधार स्तंभ है। अशोक के काल की बात की जाए तो शिक्षा और सामाजिक न्याय का युग था ।अशोक के काल में शिक्षा किसी जाति या वर्ग विशेष तक सीमित नहीं थी, उन्होंने तक्षशिला, नालंदा ,विक्रमशिला और कंधार जैसे केन्द्रो को फलने फूलने का अवसर दिया ।उन्होंने न्याय व्यवस्था में समानता ,व्यवहार समता और दंड में समानता, दंड समान सिद्धांत को लागू किया ।अशोक के 9वे शिलालेख को ध्यान से पढ़े तो उन्होंने कर्मकांड और अंधविश्वासों की कड़ी निंदा की है ।जो लोग डर या अंधश्रद्धा से करते थे ।उन्होंने धम्म मंगल पर जोर दिया। वृद्धो की सेवा, गुरु का सम्मान ,सत्य बोलना और जीवो पर दया करना यह पूर्णतः एक तर्क संगत और वैज्ञानिक जीवन पढ़ती थी । कांसोटिया आगे बताया कि दुनिया सिकंदर को महान कहती है लेकिन सिकंदर की सेना चंद्रगुप्त मौर्य के भय से व्यास नदी से वापस लौट गई थी। वास्तविकता महानता वह जहां शक्ति होने के बावजूद अहिंसा को अपनाया जावे ।अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद अपनी पूरी शक्ति जन कल्याण और धम्म के प्रचार में लगा दी। अब बहुजन समाज के लोगों को यह समझना होगा कि वे उस महान सम्राट की विरासत है जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था। समारोह को वरिष्ठ सैनिक विकास बौद्ध ने बताया कि मानसिक गुलामी का त्याग ,अंधविश्वास और पाखंड को छोड़कर बुद्ध और अशोक के वैज्ञानिक मार्ग को अपनाया जावे।जिस समाज को अपना गौरवशाली इतिहास का पता नहीं होता, वह कभी शासन नहीं कर सकता ।अपनी पहचान पर गर्व करें।
