नारी का नहीं हो अपमान।
आज नारी का करों सम्मान।।
आज की नारी, सबसे है भारी।
इनकी है घर की जिम्मेदारी।।
होली का दहन बंद करो।
औरत का सम्मान करो।।
होली नहीं अवगुण जलाओ।
किसी को मत तुम रुलाओ।।
प्रहलाद की जीत नहीं हार है।
बुआ को मारकर आप पार है।।
बेचारी को जलाना नहीं चाहिए।
इनको आगे समझाना चाहिए।।
होली त्योहार पर हो अथाह प्यार।
अडो़सी पड़ोसी के लिए रहो मदद में तैयार।।
होली नहीं अवगुण को करो नष्ट।
आप मिलकर मेटे नारी का संकट।।
होली मुंह बोली, मुझे मत मारो।
मेरे बिना जन्म नहीं है तुम्हारो।।
अगर मैं होली रुपी नारी नही होती।
तो क्या आज यह दुनिया इतनी बड़ी होती।।
आज अवगुण लिखों एक कागज के टुकड़े पर तुम।
जैसे काल,क्रोध, अंहकार, झूठ निंदा को तुली देंगें हम।।
होली की अर्थी न होकर अवगुण लिखों।
आज से अपने पड़ोसी के अच्छे गुण सीखो।।
सबसे हंसकर मीठो बोलणो,
फ़ालतू मुंह कभी नहीं खोलणो।।
एक एक मिनख को मन में तोलणो।
उणरो अवगुण मुंह पर अवश्य बोलणो।।
होली का आया बड़ा त्यौहार।
आपस में रखना है खुब प्यार।।
होली को दुश्मन नहीं कहो माता।
प्रहलाद की भक्ति की अमर बाता।।
पिता को मरवाया,बुआ को जलाया।
अपना राज तंत्र और बल को चलाया।।
धन्य हो प्रहलाद भक्त इनको मारने की बजाय सुधारते।
तो आज दुनिया में मां बाप रिश्तों को नहीं मारते।।
कहीं कहीं हमारे महापुरुषों ने गलत किया।
उस गलती को हमने मन में सीख लिया।।
किसी को मारकर जलाने से अच्छी बात।
उसको सुधारने का प्रयत्न करो दिन रात।।
उसके बावजूद नहीं सुधरे तो भेजो सुधार गृह।
बेचारा हिरणाकुश और होलिका क्यों मरे।।
साथियों को अवगुणों को पन्ने पर लिखकर रखना तैयार।
आज शाम को जलाने के लिए लकड़ी लाना चार।।
होली का त्योहार खुब मनाओ पर सादा।
किसी साथी का प्रेम और निभाओ वादा।।
आगे आवे पंचायत का चुनाव।
मिनख मिनख रो बढ जासी भाव।।
भाइयों मत लेना मोल तनाव।
एक दूजे की रखना है चाव।।
सभी साथी प्रेम पुर्वक मनाएं चुनावी पर्व।
साथियों होली और प्रहलाद दोनों पर रखना तुम गर्व।।
देखो होलिका की भक्ति आग में स्नान करती।
अग्नि के जलने के डर से नहीं डरती।।
प्रहलाद की भक्ति थी अपरम्पार।
अपने पिता को भगवान से दिया दिराया मार।।
भगवान खुद नरसिंह रुप धार।
हिरणाकुश को दिया था मार।।
साथियों बारह महिनों से आया है
त्यौहार।
भगवान खुश रखे आप सबका परिवार।।
पुनः आप होली का घणा घणा राम मानजो।
अपने परिवार रिश्तेदारों को जरुर जाण जो।।
रचनाकार
झंवताराम बामणिया
चितलवाना नगरी
मो नं 9982119028💐
