इस वर्ष सद्गुरु आचार्य गरीब साहेब की 113 वीं जयंती समारोह राजस्थान के विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए जा रहे हैं।
यह समारोह लगभग 10 -15 दिन चलते रहते हैं। कई स्थानों पर आचार्य गरीब साहेब के शिष्य एवं अनुयाई प्रति वर्ष अलग-अलग स्थानों पर परंपरा अनुसार सत्संग कार्यक्रम साज-बाज (हार्मोनियम, ढोलक, मंजीरे आदि) के साथ आचार्य गरीब साहेब द्वारा रचित भजन एवं गुरु महिमा संबंधित भजनों की प्रस्तुति देते हैं साथ ही भोजन प्रसादी करते हैं।
सत्संग समाप्ति पर साधु-संतों का सम्मान करते हुए उनको भेंट पूजा देते हैं।
मेरे सवाल –
- आचार्य गरीब साहेब की जयंती पर इस तरह भजन सत्संग करने से वर्तमान समय में समाज को क्या लाभ होता है ?
- भजन सत्संग कार्यक्रम करने से क्या सामाजिक कुरीतियों में सुधार होता है ?
- आचार्य गरीब साहेब ने अपने जीवन काल में समाज को शिक्षा, सामाजिक सुधार, आर्थिक सुधार, सामाजिक समता, पाखंड से दूर रहने तथा कुरुतियों को दूर करने संबंधी कार्य किए, क्या हम इनकी जयंती पर ऐसे कार्यों से संबंधित कोई निर्णय लेते हैं ?
- भजन सत्संग कार्यक्रम में समाज के किस आयु वर्ग के और शिक्षा स्तर के समाज बंधु उपस्थित रहकर सुनते और समझते हैं ?
- क्या भजन गायक भजनों की व्याख्या करते हैं जिससे श्रोताओं को भजन के शब्दों के भावार्थ समझ में आ सके ?
- आचार्य गरीब साहेब जयंती पर्व पर किए जाने वाले भजन सत्संग प्रवचनों से समाज के बेरोजगार युवाओं, शैक्षणिक पिछड़ेपन, महिला शिक्षा और राजनीतिक समझ के सुधार पर कोई प्रभाव पड़ता है ?
- ऐसे कार्यक्रमों से समाज के युवाओं, महिलाओं के विकास, और सामाजिक कुरीतियों के सुधार से संबंधित निर्णय या कार्ययोजनाएं पर निर्णय होते हैं ?
- क्यों नहीं हम आचार्य गरीब साहेब के समाज सुधार के दर्शन को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में युवाओं, महिलाओं के लिए समाजोपयोगी, रुचिकर बनाकर समाज को लाभान्वित करें ? ऐसे कार्यक्रमों का संयोजन करना होगा और इनका प्रचार-प्रसार जन-जन तक करना होगा।
- सद्गुरु आचार्य गरीब साहेब ने मात्र 57 वर्ष की आयु में समाज के लिए जिस तरह के कार्य किए हैं, जिस तरह लेखन कार्य कर पुस्तकें लिखी हैं इन बातों की जानकारी समाज के युवा वर्ग तक होना बहुत जरूरी है वर्ना पेटी, बाजा, ढोलक, मंजीरे बजाने, आसनों पर बैठने और भोजन प्रसादी करने से समाज को कोई विशेष लाभ नहीं होने वाला है।
चिंतन तो करना होगा। - भजन सत्संग प्रवचनों के दौरान समाज को नई दिशा देने, निर्णयात्मक कार्य करने होंगे।
- वर्तमान समय में भजन सत्संग, भोजन प्रसादी, शोभायात्राएं मनोरंजन का साधन निमित्त बन रहे हैं।
- सद्गुरु आचार्य गरीब साहेब को ब्रह्मलीन हुए लगभग 56 (2 अक्टूबर ,1970) वर्ष हो गए हैं इस अवधि में आचार्य गरीब साहेब के शिष्य, अनुयायियों का सामाजिक क्षेत्र में, कुरीति निवारण में, शैक्षणिक विकास में, राजनीतिक क्षेत्र में, समाज से पाखंड अंधविश्वास से दूर करने और साहित्य सृजन में योगदान क्या रहा है ? इसकी समीक्षा भी होनी चाहिए।
- आचार्य गरीब साहेब की जयंती उत्सव में ऐसे कार्यक्रमों का संयोजन हो जिससे युवाओं, महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीति हिस्सेदारी, सामाजिक सुधार जैसे कार्यों की प्रेरणा मिले। उनकी सक्रीय भागीदारी हो।
जय हो आचार्य गरीब साहेब की।
साहेब बंदगी 🙏🏻
डॉ गुलाब चन्द जिन्दल ‘मेघ’
सामाजिक चिंतक
उप निदेशक (से.नि.) पशुपालन विभाग, अजमेर
