एक दूसरे री मदद् करनीं, बुरों नहीं कारणों किसीको।
हाथ जोड़ राम राम करना,बुरा भला नहीं कैहना किसीको।।
मनुष्य तो मिनख बणै जदे वो सेवा करें औरौ को।
आपरो पेंट सभी भरै,वोभरे दुसरो को।।
आपरो परिवार सभी पालै,थौडो घणौ हाथ हलायको।
गरिब के लिए कुछ करे, वहीं है गुण मनुष्य को।।
असहाय की सहाय करें, दुःख में साथ देवै औरोंको।
पशु पक्षी और वनस्पति सबसे प्रेम राखे,बुरी नज़र नहीं देखें दुसरनको।।
आवत जावत सभी देखें,कोईक कहें गरिब को रोटी देवन को।
आपरा टाबर आगे बढ़ें,कोईक सहाय करें गरिब के बच्चें को।।
कोई कोई सोफे ऊपर सोवें,गरिब सोवें फुट पाथ को।
पंखा एसी कोई नर हवा खावै, कोई नहीं जाय जोवै घर गरिब को।।
मनुष्य होयं ममता ने मारो,जाय जाय देखो गरिब को।
आता जाता कोई नहीं लोग देखें,पुरसवारथ करो दुसरे भायो को।।
मारा थारा और थारा मारा,ऐडीं बातां कर्ता शूक गया इण बातों को।
नहीं थारा नहीं मारा नहीं घट जावै मान सम्मान जब सेवा करां औरों को।।
लखपती करोड़पति और राजा, नहीं लेगया साथ धन माया को।
कहें टीकम तो थै क्यूं नहीं भूलो,ऐ रंग निलामी को।।

लेखक।।
टीकमचंद मंशा राम जी।।
आदर्श ढूंढा कवास बाड़मेर राजस्थान पिन 344035.
मों 9414972123.
